अमृतसरिए खुद ही गिरा लेंगे अपनी स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग

Wednesday, February 14, 2018 8:31 AM
अमृतसरिए खुद ही गिरा लेंगे अपनी स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग

अमृतसर(रमन): स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 की सर्वे एवं रैकिंग को लेकर केवल 4 दिन बचे हैं। 15 फरवरी को सर्वे टीमें शहर में दस्तक देंगी व यहां के सारे रिकार्ड को खंगालेंगी व शहर की साफ-सफाई को लेकर लोगों से बातचीत करेंगी। स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर देशभर में अच्छे रैंकिंग लाने के लिए नगर निगम, नगर कौंसिल, कमेटियां सफाई को लेकर युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में कुल 4 हजार अंक हैं जिसमें सरकारी संस्थान 1400 अंकों पर काम करेंगे व बाकी 2600 अंक लोगों से मिलने हैं। 

रैंक के हिसाब से शहरों को केन्द्र सरकार से फंड मिलेगा। नगर निगम द्वारा 2 माह से स्वच्छता सर्वेक्षण पर काम किया जा रहा है। यहां उनके द्वारा लोगों को जागरूक करने के लिए सैमीनार, नुक्कड़ नाटक, धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं के साथ बैठकें कीं, वहीं लोगों ने निगम अधिकारियों की बातों को दरकिनार किया है। शहर में सफाई व्यवस्था को सही करने के लिए सैनेटरी इंस्पैक्टर कर्मचारियों की 2 समय हाजिरी लगाते हैं।

सिटीजन फीडबैक के हैं 35 प्रतिशत अंक
शहर की आबादी 15 लाख है व 2.35 लाख घर हैं जिनमें से 10 प्रतिशत लोगों को स्वच्छता एप डाऊनलोड करना था लेकिन 4284 शहरवासियों ने ही एप को डाऊनलोड किया जबकि कम से कम 23,500 लोगों को यह एप डाऊनलोड करना चाहिए था। इस तरह अमृतसरिए खुद अपने शहर का रैंक गिराने के लिए जिम्मेदार हैं। यह एप लोगों को लिए ही लाभदायक है। लोग यदि कहीं पर भी गंदगी देखें तो एप के जरिए शिकायत करनी थी ताकि निगम का स्वास्थ्य विभाग तुरंत उस जगह की सफाई करवाए लेकिन शहरवासी सिर्फ फोन पर अधिकारियों को शिकायत या अपने पार्षदों को कोसना जानते हैं। शहर में डायरैक्ट ऑब्जर्वेशन के 30 प्रतिशत, सिटीजन फीडबैक 35 प्रतिशत, सॢवस लैवल प्रोग्रैस के 35 प्रतिशत अंक मिलने हैं।

निगम से ली 60 ने अनुमति, सड़कों पर दिखे सैंकड़ों लंगर 
पिछले कुछ दिनों से स्थानीय निकाय मंत्री सिद्धू से लेकर नगर निगम के मेयर, कमिश्नर एवं सेहत अधिकारियों द्वारा धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं से अपील की गई थी कि शिवरात्रि पर लंगर लगाने की निगम से अनुमति लें ताकि वहां पर सफाई सेवक एवं डस्टबिन का प्रबंध किया जाए। शहर में सैंकड़ों लंगर लगे लेकिन अनुमति लगभग 60 ने ली। सारे शहर में लंगर वाली जगहों पर डिस्पोजेबल प्लेटें एवं गंदगी देखने को मिली। लंगर इतनी जगह लगे थे कि निगम भी सफाई करने में विफल रहा।  

कूड़े के नहीं प्रोसैसिंग प्लांट, कटेंगे 450 अंक
नगर निगम अमृतसर में कूड़े के डम्प के लिए अपना प्लांट नहीं है जिससे कूड़े से बिजली बनाई जा सके। बङ्क्षठडा, जालंधर, लुधियाना शहर में नगर निगमों के पास अपने प्लांट हैं जिससे इन तीनों शहरों को 450 अंक सीधे मिलेंगे लेकिन नगर निगम अमृतसर के पास कोई प्लांट नहीं जिससे निगम शुरू से 450 अंकों के नीचे आएगा। वहीं शहरवासी सूखा कूड़ा व गीला कूड़ा भी अलग-अलग नहीं करते हैं जबकि सारे शहर में निगम द्वारा लोगों को इस बारे जागरूक करने के लिए विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हैं।  

शहर में रोज उठाया जाता है 700 टन कूड़ा 
सारे शहर की आबादी लगभग 15 लाख है। निगम के अनसार प्रतिदिन 700 टन कूड़ा शहर से उठाया जाता है। अगर शहरवासी जागरूक हों और कूड़ा डस्टबिन में डालें तो सड़कों पर गंदगी न हो, लेकिन लोग डस्टबिन छोड़ सड़कों पर कूड़ा फैंक देते हैं। ज्यादातर लोग घरों से कूड़ा उठाने वाली गाडियों को भी कूड़ा देने से कतराते हैं। 



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