दशकों पुराने प्रोजैक्टों को पहनाया स्मार्ट सिटी का नकाब

Monday, June 19, 2017 5:01 PM
दशकों पुराने प्रोजैक्टों को पहनाया स्मार्ट सिटी का नकाब

लुधियाना (हितेश): स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर केन्द्र सरकार पहले से ही नाराज है कि 2 साल बाद भी ग्राऊंड लेवल पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया। वहीं, लोकल बाडीज मंत्री नवजोत सिद्धू ने भी पिछली अकाली-भाजपा सरकार पर लोगों को स्मार्ट सिटी के नाम पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। इसी बीच एक और पहलु सामने आया है कि नगर निगम द्वारा दशकों पहले बनाई गई उन योजनाओं को अब स्मार्ट सिटी का नकाब पहनाया जा रहा है। जो प्रोजैक्ट फंड की कमी कारण सिरे नहीं चढ़ पाए थे। 

स्ट्रीट लाइटों पर एल.ई.डी. प्वाइंट लगाने
लागत : 45 करोड़ से 1.5 लाख प्वाइंट होंगे कवर 
उद्देश्य : बिजली के बिल व मैंटीनैंस चाजिस कम करने
स्टेटस : प्री-बिड में सामने आई 15 कम्पनियां, 3 जुलाई को खुलेंगे टैंडर
हिस्ट्री : एनर्जी सेविंग के तहत 2009 में बनी योजना, कई बार डी.पी.आर. बनने सहित टैंडर लगे, लेकिन सिरे नहीं चढ़े। कम्पनी ने सारा पैसा खर्च करके बिजली की सेविंग में से करनी है लागत की भरपाई। फिर भी पुरानी योजनाओं को फाइनल करने की जगह लिया जा रहा स्मार्ट सिटी के नाम का सहारा। 

माडर्न स्लाटर हाऊस
लागत : 19.50 करोड़ से होगी कटाई व पैकेजिंग
उद्देश्य : खुले में अवैध मांस की कटाई रोक कर लोगों को बीमारियों से बचाना
स्टेटस : टैंडर स्टेज पर पहुंची चुकी योजना पर फिर बनेगी डी.पी.आर.
हिस्ट्री : अवैध रूप से मांस की कटाई बंद करके मैडीकल तौर पर चैक मांस ही बिकने बारे नियमों के पालन के तहत मास्टर स्लाटर हाऊस की योजना 2009 में बनी। लेकिन उस पर सही काम केन्द्र द्वारा 2015 में 7.93 करोड़ का फंड मंजूर करने पर शुरू हुआ। जिसमें से 79 लाख मिल भी गए। लेकिन निगम द्वारा अपने हिस्से के 11.57 करोड़ का प्रबंध न करने पर केन्द्र ने ग्रांट वापस मांग ली तो स्मार्ट सिटी के तहत मदद मांगी गई है। 

सार्वजनिक शौचालय बनाने
लागत :
8 करोड़ से मेन चौक, बस्तियां कवर होने सहित बनेंगे मोबाइल टायलेट। 
उद्देश्य : पब्लिक प्लेस पर गंदगी की समस्या हल करना।
स्टेटस : वर्क आर्डर की स्टेज पर पहुंचे दूसरी बार लगे टैंडर।
हिस्ट्री : निगम के पहले 50 सार्वजिनक शौचालय बने हुए हैं। जिनकी हालत काफी खस्ता होने कारण 80 लाख से मुरम्मत का काम चल रहा है। उनको संचालन के लिए सुलभ शौचालय को सौंपा जाएगा। नए शौचालय बनाने के लिए स्वच्छ भारत मुहिम के तहत प्रति सीट के हिसाब से 52 हजार की ग्रांट मंजूर हुई है। लेकिन हिस्सा डालने के मुद्दे पर निगम व कम्पनियां दोनों ने हाथ पीछे खींच लिया। अब स्मार्ट सिटी के फंड की मदद से 95 नए पब्लिक टायलेट बनाए जाएंगे। 

सरकारी बिल्डिंगों पर सोलर सिस्टम
लागत : 3.53 करोड़ से कवर होंगी 15 बिल्डिंगें।
उद्देश्य : बिजली की कमी से निपटने के लिए प्राकृतिक स्रोत अपनाना।
स्टेटस : वर्क आर्डर की स्टेज पर पहुंचे टैंडर।
हिस्ट्री : बिजली की किल्लत को दूर करने के लिए गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार ने काफी पहले से योजनाएं मंजूर की हुई हैं। उसके तहत सोलर सिस्टम अपनाने बारे करीब एक दशक पहले निगम का राजकोट व लैस्टर के साथ एग्रीमैंट तक हो गया था। लेकिन सोलर स्ट्रीट लाइटें भी नहीं लग पाईं।

सीवरेज व स्ट्राम वाटर सिस्टम
उद्देश्य : बरसाती पानी की निकासी की समस्या हल करना
स्टेटस : स्मार्ट सिटी के तहत चुने गए 2 वार्डों में बन रही डी.पी.आर.
हिस्ट्री : महानगर में सौ फीसदी वाटर सप्लाई सुविधा देने के लिए केन्द्र द्वारा जे.एन.एन. यू.आर.एम. के तहत 328 करोड़ दिए गए और हुडको लोन के तहत सौ करोड़ खर्च हुए। अब स्मार्ट सिटी के तहत चुने गए दो वार्डों में उस काम को नया नाम दिया जा रहा है जबकि स्ट्राम वाटर सीवरेज के लिए भी वल्र्ड बैंक की टीम द्वारा 5 साल पहले स्टडी करके निगम को सौंप दी गई थी। 

 



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