सॉलिड वेस्ट प्लांट मामला: ट्रिब्यूनल ने पूछा, अगर कंपनी काम छोड़ती है तो क्या हैं सरकार के प्रबंध?

Monday, July 17, 2017 10:48 AM
सॉलिड वेस्ट प्लांट मामला: ट्रिब्यूनल ने पूछा, अगर कंपनी काम छोड़ती है तो क्या हैं सरकार के प्रबंध?

भटिंडा (परमिंद्र): भटिंडा के मानसा रोड पर स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमैंट प्लांट के मामले में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सरकार से सवाल किया है कि अगर सॉलिड वेस्ट प्लांट चला रही कंपनी काम छोड़ देती है तो सरकार के पास प्लांट को चालू रखने के लिए क्या प्रबंध हैं? ट्रिब्यूनल ने इस संबंध में सरकार को 15 दिनों में अपनी रिपोर्ट सबमिट करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें सरकार से भटिंडा के प्रतिदिन निकलने वाले 110 टन तथा नजदीकी 18 नगर कौंसिलों के 350 टन कचरे के निपटारे संबंधी जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने सरकार के चीफ सचिव स्तर के अधिकारी को अगली सुनवाई के दौरान पेश होने को भी कहा है ताकि अगली नीति तैयार हो सके व संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सके। गौरतलब है कि उक्त प्लांट लगभग 28 करोड़ की लागत से लगाया गया था व अब लोगों के विरोध के कारण प्लांट को किसी और जगह तबदील करने के लिए 30 करोड़ रुपए की जरूरत है लेकिन सरकार की ओर से  पैसा न आने के कारण उक्त मामला लटका हुआ है।

लोगों के विरोध कारण लटके प्लांट  
पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डिवैल्पमैंट बोर्ड के सचिव द्वारा ट्रिब्यूनल को बताया गया था कि जालंधर में जे.आई.टी.एफ. के संचालन में चल रहे सॉलिड वेस्ट प्लांट को लोगों के विरोध कारण बंद करना पड़ा। सरकार ने फिरोजपुर में लगाए जा रहे प्लांट के टैंडर भी फिलहाल रद्द कर दिए हैं जबकि भटिंडा के सॉलिड वेस्ट प्लांट की हालत भी ठीक नहीं है व लोगों द्वारा उक्त प्लांट का भी विरोध किया जा रहा है। गौरतलब है कि भटिंडा में भी जे.आई.टी.एफ. की ओर से ही उक्त प्लांट चलाया जा रहा है जिसका कुछ समय पहले टिपिंग फीस लटकने को लेकर निगम से विवाद हो चुका है। कंपनी उक्त प्लांट को प्रदूषण मुक्त करने व इससे उठने वाली बदबू को दूर करने पर भी भारी भरकम राशि खर्च कर चुकी है लेकिन इसके बावजूद लोग उक्त प्लांट को शहर से बाहर निकालने पर अड़े हुए हैं। कंपनी को लोगों के विरोध के कारण भी दिक्कतें हैं जिस कारण कंपनी इस प्रोजैक्ट से हाथ खींच सकती है। 



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