मेयर जगदीश राजा क्यों नाराज हैं?

12/2/2020 6:12:56 PM

जालंधर(सोमनाथ): रैडक्रॉस भवन में मंगलवार को नगर निगम के पार्षद हुई की बैठक हुई। शहर के विकास कार्यों सहित कुल 67 प्रस्तावों पर चर्चा होनी थी लेकिन शोर-शराबे के बीच नौबत एजैंडा छीने जाने तक पहुंच गई। कुल मिलाकर करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में जिन मुद्दों प्रस्ताव पर पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई गई थी उन पर चर्चा तक नहीं होने से मेयर जगदीश राज राजा नाराज हैं। मेयर ने मंच से करीब तीन बार एजैंडे पर बात करने को कहा  लेकिन हाथ में माईक  लिए खड़े पार्षद अपने मुद्दे और मांगें उठाने तक सीमित थे और जिन कौंसलरों व चेयरमैनों ने सवालों के जवाब देने होते हैं वे सवाल पूछे रहे थे। यही नहीं एक एडहॉक कमेटी मैंबर द्वारा मंच पर जाकर इस्तीफा तक दिया गया। इससे भी मेयर राजा आहत हैं। हालांकि मेयर द्वारा यह भी कहा गया कि क्यों ने हम जीरो ऑवर के लिए अलग से पूरा दिन रख लिया करें। मेयर भविष्य में पार्षद हाऊस की बैठक दो दिन करने के बारे में पार्षदों की सहमति से फैसला ले सकते हैं।    

सबकुछ ठीक नहीं चल रहा निगम में
पार्षद अंजलि भगत दो एडहॉक कमेटियों की मैंबर हैं। पहली कमेटी लैंडस्केप एंड ब्यूटीफिकेशन जिसकी चेयरपर्सन वार्ड-37 से पार्षद कमलेश ग्रोवर हैं   और दूसरी कमेटी टैक्स एंड प्रॉपर्टी विभाग, जिसकी चेयरपर्सन वार्ड-67 से पार्षद कवलजीत कौर गुल्लू हैं। अंजलि भगत का कहना है कि उन्हें आज तक इन दोनों कमेटियों की बैठकों में बुलाया तक नहीं गया। खाली डमी एडहॉक कमेटियां बनाकर उन पर चेयरमैन और मैंबर बिठा दिए गए हैं। जब कमेटियों की कोई बैठक ही नहीं होनी तो ऐसी कमेटियों और उनके मैंबर बनने का क्या फायदा। उल्लेखनीय है कि अफसरशाही ने रवैये के चलते बिल्डिंग एडहॉक कमेटी के चेयरमैन निर्मल सिंह निम्मा भी कई बार कमेटी भंग करने की बात कह चुके हैं और वहीं हैल्थ एंड सैनिटेशन कमेटी की मैंबर वार्ड नं. 71 से पार्षद सतिंदर कौर खालसा भी एडहॉक कमेटी से इस्तीफा दे चुकी हैं। हालांकि अभी तक कोई इस्तीफ मंजूर नहीं हुआ है मगर उनकी समस्या का कोई समाधान भी नहीं हुआ है। दस दिन में उनकी समस्या का हल निकाले जाने के वादे के डेढ़ महीने से ज्यादा समय के बाद भी उनकी समस्या वहीं कि वहीं हैं। 

शहर को ‘डर्टी सिटी’ नाम दिया पार्षद जसपाल कौर ने
वार्ड नं. 45 से पार्षद जसपाल कौर से जब एजैंडा छीनने के संदर्भ में बात की गई तो उनका कहना था कि अपनी बात उठाने का सबको संवैधानिक हक है और वह संवैधानिक तरीके से बैठक में अपनी समस्याएं रख रही थीं लेकिन उनकी समस्याओं को सुनने की बजाय एजैंडा पढऩा शुरू कर दिया गया। क्या उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पांच सवाल उठाए थे, जिनका वह जवाब चाहती थीं। उनकी वार्ड में गोबिंद नगर में परमानैंट डंप बना दिया गया है। जब यह डंप लगाया जा रहा था तो उनके विरोध पर यूनियन ने कहा था कि यह डंप अस्थाई है। इसके अलावा उनकी वार्ड के कुछ सफाई कर्मियों की मौत के बाद उनकी जगह भर्ती तो हो गई लेकिन आज तक  उनकी वार्ड को सफाई कर्मचारी वापिस नहीं मिले। उनका अगला सवाल वार्ड को रैगुलर ट्रॉली का था। इसके अलावा शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर वह जवाब मांग रही थीं। नगर की तरफ से स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन शहर के हालात ‘डर्टी सिटी’ वाले हैं। भगवान महावीर मार्ग , टीवी सैंटर के आगे और कन्या महाविद्यालय के पास बने डंपों के हालात खुद बयां करते हैं कि शहर कितना स्वच्छ है।


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