बेसहारा गायों का बढ़ता संकट : गौ सैस के बावजूद संभाल की कमी पर प्रशासन घेरे में
punjabkesari.in Monday, Mar 30, 2026 - 02:55 PM (IST)
मोगा/कोटईसे खां (गोपी राऊके): भारत में गाय को मां का दर्जा दिया गया है और धार्मिक रूप से उसकी पूजा भी की जाती है लेकिन असल में बेसहारा गायों की हालत काफी दयनीय बनी हुई है। एक तरफ सरकार गौ सैस के नाम पर लोगों से टैक्स वसूल रही है वहीं दूसरी तरफ सड़कों, गलियों और खेतों में घूमने वाली बेसहारा गायों की देखभाल का कोई सही इंतजाम नहीं है। यह मुद्दा अब एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंता का रूप ले चुका है। ये विचार भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के जिलाध्यक्ष सुखविंदर सिंह बहरामके ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बूढ़ी गायों की कोई सुध लेने को तैयार नहीं है जिनसे दूध की कोई उम्मीद नहीं है। नतीजतन, ये जानवर आम लोगों और किसानों के लिए बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। गायों के अचानक सड़कों पर आ जाने से हादसे हो रहे हैं जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। आवारा जानवर खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। कभी-कभी इससे पड़ोसी किसानों के बीच झगड़े भी हो जाते हैं।
राहगीरों और स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे पर जताई चिंता
राहगीरों और स्थानीय लोगों ने चिंता जताई और कहा कि रात में सड़कों पर आवारा गायों के झुंड बड़े एक्सीडैंट का कारण बनते हैं। कभी-कभी ड्राइवरों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं, जिससे वे पीछे से आ रही गाड़ियों से टकरा जाते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि आवारा पशुओं को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित जगहों पर रखने के लिए स्पैशल टीमें बनाई जाएं। इसके साथ ही, पशुपालकों के लिए भी सख्त नियम बनाए जाएं ताकि वे अपने पशुओं को आवारा न छोड़ें। कुल मिलाकर, गायों की सुरक्षा और देखभाल सिर्फ धार्मिक या भावनात्मक मुद्दा नहीं है बल्कि यह लोगों की सुरक्षा, खेती और प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। अगर इस मुद्दे को समय रहते हल नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह और गंभीर रूप ले सकता है।
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