कुश्ती व फिल्मी दुनिया ही नहीं, राजनीतिक अखाड़े में भी कम नहीं थे  "रुस्तम-ए- हिंद" दारा सिंह

7/12/2020 1:54:37 PM

जालंधर। कुश्ती की दुनिया में अमिट छाप छोड़ने वाले अजेय पहलवान रुस्तम-ए- हिंद का आज 12 जुलाई के ही दिन 2012 को निधन हुआ था। उनकी पुण्यतिथि पर सारा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में 500 से ज्यादा कुश्ती के मुकाबले लड़े थे और उन्हें कोई भी नहीं हरा पाया था। यही नहीं  दारा सिंह को एक जमाने में बॉलीवुड के एक्शन किंग के नाम से भी जाना जाता है। यह भी सभी जानते हैं कि उन्होंने रामायण में हनुमान का किरदार निभाकर देशवासियों के दिलों पर अनूठी छाप छोड़ी है। उनकी पुण्यतिथि पर आपको बता रह हैं कि रुस्तम-ए- हिंद ने  कुश्ती और फिल्मी दुनिया में ही अपने जौहर नहीं दिखाया बल्कि देश की राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई। वह देश के पहले ऐसे खिलाड़ी थे  जिन्‍हें राज्‍यसभा का सदस्य नॉमिनेट किया गया था।  देश के कई मंत्रालयों की अहम कमेटियों के भी वह सदस्य रहे।

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ऐसा था पहलवानी का दौर...
-दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर 1928 को अमृतसर में हुआ था।
-उनकी पहली प्रोफेशनल फाइट एक इटैलियन पहलवान से हुई थी। 
-दोनों के बीच हुआ वो मुकाबला बराबर रहा था और इस दौरान उन्हें 50 डॉलर इनाम भी मिला था।
-1954 में वे भारतीय कुश्ती के चैम्पियन बने थे। 
-1959 में  ने कॉमनवेल्थ कुश्ती चैम्पियनशिप में कनाडा और नूज़ीलैंड के वर्ल्ड चैम्पियंस को हरा दिया था।
-1968 वह अमरीका के वर्ल्ड चैम्पियन को हराकर और फ्री स्टाइल कुश्ती के वर्ल्ड चैम्पियन बन गए थे। 
-रांची में दारा सिंह का मुकाबला किंग कांग के साथ हुआ था। उस समय वह थे 130 किलो के थे।
-उन्होंने 200 किलो के किंग कांग को रिंग से बाहर फैंक दिया था।

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फिल्मी करियर
-दारा सिंह ने शुरुआती दौर में फिल्‍मों स्‍टंट मास्‍टर की भूमिका अदा की।
-ऐक्‍टर के रूप में उनकी पहली फिल्‍म संगदिल 1952  में रिलीज हुई थी। 
-इस फिल्‍म में उनके साथ दिलीप कुमार और मधुबाला नजर आये थे।
-फिल्मी करियर के दौरान उन्‍होंने 146 फिल्मों में काम किया।। 
-फर्ज, कल हो ना हो, मर्द और चम्‍बल की रानी उनकी प्रमुख फिल्में रही हैं। 
-टीवी सीरियल रामायण में निभाए हनुमान के किरदार के लिए उन्हें पूरे देश में जाना जाता है। 
-2005 में उन्हें सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन का अध्यक्ष भी चुना गया था।

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राजनीति और दारा सिंह
-वह समाज और समुदाय के दूसरे कामों से भी जुड़े रहे।
-वह 1997 में अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष पद पर भी रहे।
-साल 2003 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी की तरफ से राज्यसभा का सदस्य बनाया गया।
-2004 से 2006 तक वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कमेटी के सदस्य भी थे। 
-2004 में ही उन्हें खेल मंत्रालय की परामर्श समिति का सदस्य भी बनाया गया था। 
-2006 में उन्हें सूचना और प्रौद्योगिकी समिति के सदस्य भी मनोनीत किया गया था।
-इसी दौरान वह सूचना और प्रसारण मंत्रालय के लिए सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे।


Suraj Thakur

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