जेल की सलाखों के पीछे से निकला ''गुलदस्ता'', किताब ने सबको किया हैरान
punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 09:56 PM (IST)
लुधियाना (स्याल): जेल एक ऐसी जगह है, जिसका नाम सुनते ही शरीफ आदमी तो क्या अपराधियों के पसीने छूट जाते हैं। जेल में जाते ही कुछ लोग जीवन की मुख्य धारा से ही टूट जाते हैं। पर ताजपुर रोड की सैंट्रल जेल में आये दिन जहां आपराधिक गतिविधियों की सूचनाएं मिलती रहती है। वहीं इस बार जेल से कविताओं व रचनाओं की खुशबू आई है। जिस पुस्तक का नाम है (गुलदस्ता) पंजाबी भाषा में तैयार की गई। इस पुस्तक में कविताओं व गीतों का सुमेल है। आज इस पुस्तक को सैट्रल जेल के परिसर से पाठकों के लिए जारी कर दिया गया। इसमें अपनी रचनाओं को कैदी योगेश कुमार उर्फ बावा, कैदी कुलदीप सिंह उर्फ मीना,हवालाती गुरप्रीत सिंह, गुरविन्द्र सिंह उर्फ रोजी व कमलप्रीत सिह ने अपना सहयोग दिया है और साबित कर दिया कि उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे भी अपनी कला को मरने नहीं दिया।
इन बंदियों के बारे सुपरीटेंडेंट कुलवंत सिंह सिद्धू, एडिश्रल सुपरीटेंडेंट बलवीर सिंह, डिप्टी सुपरिटेंडेंट फैक्टरी हरबंस सिंह आदि ने कहा कि इन कैदियों व हवालातीयो में जो कला छिपी है। उसे उन्होंने समाज के सामने उजागर किया है। व इनके गीतों व कविताओं की एक एक पंक्ति समाज की तस्वीर को पेश करती है। उन्होंने बताया कि इनकी उक्त रचना भरी किताब को जेल के बंदियों में भी बांटा गया है।ताकि इनसे प्रेरित होकर वह जीवन के सत्य को समझें व अपराध की जिंदगी को छोडक़र समाज की मुख्य धारा में लौटने के लिए प्रेरित हों। हालांकि अगर देखा जाए तो कैदियों द्वारा की गई। इस पहल ने जेल के स्टाफ को भी प्रभावित किया है, क्योंकि अक्सर जेल की सलाखों में बैठे बंदियों के बारे बेशक समाज कुछ भी सोचे लेकिन कला की जोत की चमक हर जगह फैलती है।

