''शहर के दिल'' में कांग्रेस और अकाली दल की गैरहाजरी, लोकतंत्र का संकट या रणनीतिक मजबूरी?

punjabkesari.in Sunday, May 17, 2026 - 02:30 PM (IST)

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होता है, जिसमें हर पार्टी अपनी ताकत दिखाने के लिए मैदान में उतरती है। लेकिन बरनाला नगर कौंसिल चुनाव में वार्ड नंबर 31 एक ऐसी अजीब तस्वीर पेश कर रहा है, जो न केवल चौंकाने वाली है बल्कि पंजाब की राजनीति के बदलते समीकरणों की गहरी कहानी भी बयां करती है। जिस वार्ड को बरनाला का दिल कहा जाता है जहां सदर बाजार की रौनक है, फरवाही बाजार की चहल-पहल है और हंडिआया बाजार का ऐतिहासिक महत्व है उसी वार्ड से कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल जैसी दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियां चुनावी मैदान से बाहर हैं। यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है जिसे पढ़ना जरूरी है। 

लोकतंत्र में चुनाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं होते, बल्कि यह राजनीतिक दलों के वजूद, उनकी जमीनी पकड़ और उनके भविष्य का आइना भी होते हैं। पंजाब के नवगठित नगर निगम बरनाला के पहले ऐतिहासिक चुनावों के बीच एक ऐसी राजनीतिक घटना सामने आई है, जिसने पूरे जिले ही नहीं, बल्कि राज्य के सियासी रणनीतिकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहरी राजनीति में जहां हर एक वार्ड को प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जाता है, वहीं बरनाला के सबसे वीआईपी और व्यापारिक क्षेत्र माने जाने वाले वार्ड नंबर 31 से कांग्रेस पार्टी और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) जैसे पारंपरिक राजनीतिक दिग्गजों का कोई आधिकारिक प्रत्याशी मैदान में न होना, एक नए और अप्रत्याशित राजनीतिक शून्य की ओर इशारा कर रहा है। इसे लेकर शहर के मुख्य बाजारों तक में चर्चाएं गर्म हैं।

क्या है वार्ड नंबर 31 का समीकरण और इसका महत्व? 

वार्ड नंबर 31 को साधारण शब्दों में 'बरनाला का दिल' कहा जाता है। इस वार्ड के तहत शहर के सबसे पुराने, प्रतिष्ठित और प्रमुख व्यापारिक हिस्से आते हैं, जिनमें: सदर बाजार, फरवाही बाजार, हंडिआया बाजार यह पूरा क्षेत्र बरनाला की आर्थिक रीढ़ है। यहां का व्यापारी वर्ग, दुकानदार और आम नागरिक दशकों से शहर की राजनीति की दशा और दिशा तय करते आए हैं। इस मुख्य गढ़ में केवल सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय पानागढ़ (भाजपा) के बीच सीधी टक्कर होना, पारंपरिक त्रिकोणीय या चौकोणीय मुकाबले के इतिहास में एक अजीब मोड़ है।

कांग्रेस का दफ्तर यहीं, उम्मीदवार कहीं नहीं 

सबसे दिलचस्प और विरोधाभासी तथ्य यह है कि कांग्रेस पार्टी का जिला दफ्तर इसी वार्ड के सदर बाजार में स्थित है। हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को इसी दफ्तर से तिरंगा फहराया जाता है, नेता भाषण देते हैं, कार्यकर्ता जुटते हैं। लेकिन जब वोट मांगने का वक्त आया तो पार्टी का कोई प्रतिनिधि मैदान में नहीं है। यह स्थिति एक पुरानी कहावत की याद दिलाती है "घर में दीया जले, बाहर अंधेरा।" पार्टी का मुख्यालय तो यहीं है, लेकिन जनता के बीच जाने का साहस नहीं। 2015 के नगर कौंसिल चुनाव में इसी वार्ड से कांग्रेस के राजीव लूबी ने चुनाव लड़ा था और लगभग 1200 वोट हासिल किए थे। यानी पार्टी का एक ठोस वोट बैंक यहां मौजूद था। लेकिन एक दशक के भीतर वह नींव इतनी कमजोर पड़ गई कि पार्टी को उम्मीदवार ही नहीं मिला या मिला तो वह मैदान में उतरने को तैयार नहीं हुआ।

शिरोमणि अकाली दल की चुप्पी भी संदेहास्पद 

सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि पंजाब की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी शिरोमणि अकाली दल (बादल) का भी इस वीआईपी वार्ड से नदारद रहना हैरान करने वाला है। अकाली दल का हमेशा से शहरी व्यापारियों के एक वर्ग पर अच्छा प्रभाव रहा है। मुख्य बाजारों से अकाली दल का गायब होना यह संकेत देता है कि पार्टी शायद अभी भी अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है और शहरी क्षेत्रों में उसकी पकड़ कमजोर हो रही है।

जनता का क्या होगा? 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस राजनीतिक अनुपस्थिति का खामियाजा आखिरकार मतदाता को भुगतना पड़ता है। जब चुनाव में विकल्प सीमित हों, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। वार्ड नंबर 31 के मतदाताओं के पास अब केवल दो ही विकल्प बचे हैं सत्तारूढ़ दल या भाजपा। व्यापारी वर्ग, जो इस वार्ड की रीढ़ है, चाहता है कि उनके सामने ज्यादा विकल्प हों ताकि वे जवाबदेह प्रतिनिधि चुन सकें। लेकिन पार्टियों की गैरहाजरी ने उनसे यह अधिकार छीन लिया है।

शहर का दिल धड़क रहा है, राजनीति सुन नहीं रही

बरनाला का वार्ड नंबर 26 आज पंजाब की बदलती राजनीति का आईना है। एक तरफ सत्ता का दबदबा बढ़ रहा है, दूसरी तरफ विपक्षी दल जमीन खोते जा रहे हैं। कांग्रेस का दफ्तर इसी वार्ड में है यह विडंबना किसी व्यंग्य से कम नहीं। अब देखना यह होगा कि इस वार्ड के मतदाता इस राजनीतिक शून्य का जवाब किस तरह देते हैं। शहर का दिल धड़क रहा है लेकिन राजनीतिक दल उसकी आवाज सुनने में नाकाम नजर आ रहे हैं।

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News Editor

Kalash

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