Ludhiana: नाबालिग लड़की की शादी कराने का आरोप, मंदिर से लेकर थाने तक मचा बवाल

punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 02:20 PM (IST)

लुधियाना (गणेश/सचिन): थाना बस्ती जोधेवाल क्षेत्र के अंतर्गत काकोवाल रोड स्थित चीमा डेयरी के नजदीक एक मंदिर में कथित रूप से नाबालिग युवती का विवाह कराए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल मंदिर में विवाह संपन्न कराने वाले पंडित की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि युवक द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यू शिवपुरी निवासी कृष्णा नामक युवक एक युवती के साथ मंदिर में विवाह कराने पहुंचा था। युवक का दावा है कि मंदिर में विधिवत विवाह की रस्में संपन्न कराई गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार युवती की उम्र लगभग 16 वर्ष जबकि युवक की उम्र करीब 18 वर्ष बताई जा रही है। आरोप है कि दोनों की आयु कानूनी विवाह सीमा से कम होने के बावजूद विवाह कराया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाह की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैसे ही युवक और युवती मंदिर परिसर से बाहर निकले, आसपास के लोगों को मामले की जानकारी मिली। लोगों को संदेह हुआ कि युवती नाबालिग हो सकती है, जिसके बाद युवक को रोककर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक विवाह कराने वाला पंडित कथित रूप से वहां से जा चुका था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने युवक को पुलिस के हवाले कर दिया।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि युवती वास्तव में नाबालिग थी, तो विवाह से पहले उसकी आयु संबंधी दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाह कराने वाले पंडित और मंदिर प्रबंधन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि बिना दस्तावेजों की जांच किए विवाह कराया गया है तो यह गंभीर लापरवाही अथवा संभावित मिलीभगत का मामला हो सकता है।

युवक कृष्णा का दावा है कि पुलिस उसे अपने साथ थाना बस्ती जोधेवाल ले गई, जहां उससे और उसके परिजनों से पूछताछ की गई। युवक के अनुसार पुलिस ने दोनों पक्षों से लिखित बयान लिए। उसका कहना है कि लिखित कार्रवाई के दौरान तैयार किए गए दस्तावेजों की एक प्रति उसे और दूसरी प्रति युवती को दी गई। युवक का आरोप है कि थाने में कार्रवाई के दौरान उसके पिता से करीब 20 हजार रुपये लिए गए, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। हालांकि इस आरोप की किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। युवक का कहना है कि यदि मामला कथित नाबालिग विवाह से जुड़ा हुआ था और युवती की उम्र को लेकर संदेह था, तो जांच पूरी होने तक उसे और युवती को कानूनी प्रक्रिया के तहत रखा जाना चाहिए था। युवक का दावा है कि लिखापढ़ी की कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों को घर जाने की अनुमति दे दी गई।

युवक के अनुसार पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और दस्तावेज तैयार किए, लेकिन इसके बाद उन्हें जाने दिया गया। युवक का कहना है कि यदि पुलिस को नाबालिग विवाह की आशंका थी तो मामले की विस्तृत जांच पूरी होने तक आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इसी कारण पूरे घटनाक्रम को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि पुलिस के पास नाबालिग विवाह संबंधी सूचना थी, तो मामले में कौन-कौन सी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई गईं और किन परिस्थितियों में युवक एवं युवती को घर भेजा गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

जब इस संबंध में थाना बस्ती जोधेवाल के प्रभारी अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। थाना प्रभारी ने बताया कि सभी तथ्यों की पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, नियमों का उल्लंघन अथवा अन्य अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में बाल विवाह कानूनन अपराध है। यदि कोई व्यक्ति, अभिभावक, आयोजक, मध्यस्थ या विवाह संपन्न कराने वाला व्यक्ति जानबूझकर नाबालिगों का विवाह कराता है, तो उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में विवाह कराने वाले पंडित, सहयोगी व्यक्तियों और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है, लेकिन इस घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि युवती वास्तव में नाबालिग थी तो मंदिर में विवाह कैसे कराया गया, विवाह संपन्न कराने वाला पंडित मौके से क्यों चला गया, पुलिस ने मौके पर पहुंचने के बाद कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई की, और लिखापढ़ी के बाद युवक व युवती को किन परिस्थितियों में घर भेजा गया। इसके अलावा युवक द्वारा लगाए गए 20 हजार रुपये लेने के आरोप भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरे घटनाक्रम में किसकी क्या भूमिका रही और क्या किसी स्तर पर नियमों अथवा कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की गई।

नोट: इस रिपोर्ट में पुलिस पर रुपये लेने, युवक को छोड़ने तथा अन्य आरोप संबंधित पक्ष द्वारा लगाए गए दावों के आधार पर शामिल किए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
 


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News Editor

Kamini

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