पंजाब में मिल रही फ्री सुविधाओं से जुड़ी बड़ी खबर, सुप्रीम कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा...
punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 01:34 PM (IST)
चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में लोगों को फ्री में मिल रही सुविधाओं पर सख्त टिप्पणी की है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक मामले में फ्री स्कीमों पर सख्त टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि अगर राज्य लोगों को सब कुछ फ्री में देने लगेगा, तो वे काम क्यों करेंगे। कोर्ट ने कहा कि ऐसा सभी राज्यों में हो रहा है और पंजाब भी इससे अछूता नहीं है। असल में, राज्य की हर सरकार ने पिछली सरकार की सब्सिडी बंद करने के बजाय नई सब्सिडी देने पर जोर दिया ताकि लोगों को वोटों के लिए लुभाया जा सके। पंजाब में समय-समय पर सरकारों ने वोट बैंक बनाने के लिए सब्सिडी का चलन शुरू किया, लेकिन किसी सरकार ने इसे रोकने की हिम्मत नहीं की, बल्कि हर सरकार ने इसे बढ़ाया ही है। अब हालत यह है कि कोई भी सरकार वोट बैंक की वजह से इसे बंद करने का रिस्क नहीं लेना चाहती। पंजाब पर इस समय 28,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का बोझ है और इसे रोकना आसान नहीं है।
अभी से होने लगी हैं घोषणाएं
पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं, लेकिन वोटरों को लुभाने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने अभी से मुफ्त की रेबड़ियां देने की घोषणाएं शुरू कर दी हैं। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने सत्ता में आने पर बुढ़ापा पेंशन 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,100 रुपये करने और शगुन स्कीम के तहत 1 लाख रुपये देने की घोषणा की है, वहीं आम आदमी पार्टी अपनी सरकार के आखिरी साल में महिलाओं को 1,000-1,000 रुपये देने की तैयारी कर रही है, जिस पर मार्च में पेश होने वाले बजट के दौरान फैसला लिया जा सकता है।
किस वर्ग पर कितनी सब्सिडी हो रही है खर्च
किसानों, घरेलू और इंडस्ट्रियल सेक्टर को मुफ्त और सस्ती बिजली देने पर 22,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार बुढ़ापा पेंशन पर 4,800 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
सरकारी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा के लिए 750 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
कब शुरू हुआ सब्सिडी देने का कल्चर?
पंजाब में सब्सिडी देने का कल्चर साल 1997 से शुरू हुआ, जो आज भी जारी है। इसे कम करने के बजाय हर साल बढ़ाया जा रहा है। अभी सब्सिडी पर करीब 28 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
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