CAA व कश्मीर जैसे मुद्दों को भाजपा द्वारा उठाने के बाद कांग्रेस को पंजाब में हिन्दू लीडरशिप को और मजबूती देने का मामला उछला

punjabkesari.in Friday, Jan 24, 2020 - 09:13 AM (IST)

जालंधर(धवन): केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (सी.ए.ए.) के मामले को लेकर देशभर में छेड़े गए अभियान को देखते हुए तथा पिछले समय में कश्मीर में धारा-370 को खत्म करके उठाए गए कदमों के बाद पंजाब में कांग्रेस के अंदर हिन्दू लीडरशिप को और मजबूती देने का  मामला उछला है।

यद्यपि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने पंजाब कांग्रेस कमेटी की बागडोर हिन्दू नेता सुनील जाखड़ तथा को-आर्डीनेशन कमेटी में 2 हिन्दू मंत्रियों सुन्दर शाम अरोड़ा व विजय इंद्र सिंगला को शामिल करवाया है, पर फिर भी अभी हिन्दू लीडरशिप को और आगे रखने की जरूरत कांग्रेस में महसूस की जा रही है। सुन्दर शाम अरोड़ा ने जिस तरह से फगवाड़ा उप-चुनाव में कांग्रेस को जीत का सेहरा बंधवाने में सफलता हासिल की, उसको मुख्यमंत्री ने भी स्वयं सराहा था।

पंजाब कैबिनेट में हिन्दू मंत्रियों को भी प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। भाजपा ने अपने केन्द्रीय मंत्रियों को जिस तरह से देशभर में सी.ए.ए. को लेकर अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भेजना शुरू किया है, उसका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस के अंदर यह बात उभर रही है कि हिन्दू लीडरशिप को मजबूती देकर कांग्रेस व मुख्यमंत्री अमरेन्द्र सिंह संगठन व सरकार की और बेहतर छवि जनता के बीच में पेश कर सकते हैं। 

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के समय राज्य में हिन्दू वोट बैंक का कुछ हिस्सा गंवाया था तथा इस बात को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने भी स्वीकार किया था, परन्तु उसके बाद फगवाड़ा तथा मुकेरियां जैसी शहरी बहुल्य सीटों पर हिन्दुओं का भरोसा कांग्रेस ने फिर से जीत लिया था। इन उप-चुनावों में जीत के बाद कांग्रेस में कैप्टन अमरेन्द्र सिंह की रणनीतिक व कूटनीतिक सोच को सराहा था कि उन्होंने हिन्दू कांग्रेसी मंत्रियों को चुनावी प्रभारी बनाकर इस समुदाय को उपचुनाव में अपने साथ जोड़ा। 

कांग्रेसी हलकों का मानना है कि कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने फगवाड़ा विधानसभा सीट के उपचुनाव में चुनाव प्रभारी जिस तरह से हिन्दू कैबिनेट मंत्री सुन्दर शाम अरोड़ा को बनाया था, जिसके बाद एक अच्छे नतीजे सामने आए थे। इसी तरह से मुकेरियां में भी उन्होंने हिन्दू मंत्रियों की जिम्मेदारियां लगाई थीं। अब चूंकि 2 वर्ष बाद राज्य विधानसभा के आम चुनाव होने हैं, इसलिए इस बात की जरूरत महसूस की जा रही है कि पंजाब में हिन्दू लीडरशिप को और मजबूती दी जाए ताकि भाजपा का शहरी क्षेत्रों में और प्रभावी ढंग से कांग्रेस मुकाबला कर सके व मिशन-2022 को पुन: फतेह करने में सफलता हासिल कर सके। 


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