कैप्टन अमरिंदर सिंह ने PM मोदी से  ‘दिमागी नक्सलवाद’ का पूछा मतलब

punjabkesari.in Friday, Sep 04, 2026 - 04:17 PM (IST)

पंजाब डेस्क: राजनीति से जुड़ी खबर सामने आई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘दिमागी नक्सलवाद’ का मतलब पूछते रहे हैं। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सलवाद’ को रोकने की बात कही थी। अब इसी मुद्दे पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और BJP के सीनियर नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने आर्टिकल के जरिए प्रधानमंत्री मोदी से ‘दिमागी नक्सलवाद’ शब्द को स्पष्ट करने को कहा है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, ''जब प्रधानमंत्री किसी वर्ग को ‘पहचानने’ और ‘अलग-थलग’ करने की बात कहते हैं, तो यह साफ होना चाहिए कि ‘दिमागी नक्सल’ और जायज असहमति के बीच सीमा रेखा क्या है। अगर यह शब्द उन लोगों के लिए है जो जानबूझकर माओवादी हिंसा को बढ़ावा देते हैं, तो यह अंतर स्पष्ट किया जाना चाहिए। लोकतंत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके लिए जायज और असहमति को नक्सलवाद के दायरे में नहीं रखा जा सकता। इस पर लक्ष्मण रेखा खींचनी होगी।''

कैप्टन ने कहा कि ‘दिमागी नक्सलवाद’ की कैटेगरी जायज असहमति से कैसे अलग है। नक्सल शब्द का इस्तेमाल हल्के में नहीं किया जाना चाहिए। भारत को नेशनल सिक्योरिटी और डेमोक्रेटिक आजादी में से किसी एक को नहीं चुनना चाहिए, अगर सही से समझा जाए तो दोनों एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने युवाओं के हालिया विरोध प्रदर्शनों को ‘दिमागी नक्सलवाद’ नहीं कहा, लेकिन राजनीतिक शब्द कभी-कभी अपने असली संदर्भ तक सीमित नहीं रहते। कैप्टन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह साफ करना चाहिए कि ‘दिमागी नक्सलवाद’ शब्द का क्या मतलब है।

इसी के साथ ही कैप्टन ने कहा कि, नक्सली संगठन सिर्फ बंदूक उठाने वाले कैडरों के भरोसे नहीं चलता। इस भर्ती के लिए फंडिंग, प्रचार, पनाह और लॉजिस्टिक्स से जड़े लोग भी नेटवर्क तक मदद पहुंचाते हैं। इसके साथ ही साजिश रचने के लिए मदद करते हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और नौकरी की मांग करने वाले युवा, परीक्षा के लिए प्रदर्शन करने वाले छात्र, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले या फिर किसान विरोध करने पर ‘दिमागी नक्सल' नहीं हो जाते। किसी को सिर्फ उसकी असहमति या विरोध के आधार पर उग्रवादी मानना गलत होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में क्या कहा था

15 अगस्त को अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सालों से माओवादी विचारधारा वाले लोगों ने देश की सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बना ली थी। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के तौर पर भी माओवादी विचारधारा ने नीतियों पर असर डाला था। उन्होंने कहा था, "मेरे प्यारे देशवासियों, जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है, लेकिन हथियारबंद नक्सली चले गए हैं, लेकिन समझदार नक्सली मौके ढूंढ रहे हैं। वे समाज को गलत रास्ते पर लाने के लिए अलग-अलग तरीके ढूंढ रहे हैं। बस नक्सलियों की पहचान करनी है। इन समझदार नक्सलियों को अलग-थलग करना है और देश की युवा पीढ़ी को एकजुट करके देश को एक विकसित देश बनाना है।"

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News Editor

Kamini

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