लुधियाना: IIFL ब्रांच में हुई लूट का मामला, लुटेरों की सूचना देने वालों को मिलेगा 5 लाख का ईनाम

2/18/2020 6:45:30 PM

लुधियाना(ऋषि, बेरी): गिल रोड पर आई.आई.एफ.एल. (इंडिया इन्फोलाइन फाइनांस लि.) में दिन-दिहाड़े हुई लूट से मात्र 15 मिनट पहले ब्रांच मैनेजर ने मुम्बई में फोन करके सेफ का डोर खोलने के लिए ओ.टी.पी. लिया था, क्योंकि किसी ग्राहक ने कंपनी को ब्याज के पैसे दिए थे, जिसे सेफ में रखना था। इसके बाद वारदात हुई तो पुलिस को पहले शक था कि शायद सेफ का डोर खुला होने के चलते डकैती हुई है। 

इसके चलते पहले पुलिस ऑफिसरों की फौज मैनेजर व अन्य स्टाफ को लेकर ब्रांच पहुंची, जहां पर सारा सीन री-क्रिएट किया गया। इसके बाद मैनेजर को फिरोज गांधी मार्कीट स्थित कंपनी की दूसरी ब्रांच में ले जाया गया, जहां पर डोर को जाने वाली बिजली की सप्लाई बंद की गई और लॉक को चाबी से खोला गया तो सेफ खुल गया। इससे पुलिस को यह क्लीयर हो गया कि लाइट बंद होने के बाद चाबी से लॉक खोला जा सकता है और यह भी पुलिस ने कंपनी से क्लीयर किया कि सुबह 9.56 बजे डोर खोलने के बाद उसे बंद किया गया है। 

लुटेरों की सूचना देने वालों को मिलेगा 5 लाख का नकद ईनाम: सी.पी. अग्रवाल
लूट के 10 घंटे गुजरने से पहले पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल की तरफ से जहां लोगों से अपिल की गई है कि बिना बिल दिखाए सोना बेचने वाले से कोई भी आम आदमी और ज्वैलर सोना न खरीदें। अगर उनके संपर्क में कोई ऐसा संदिग्ध आता है तो तुरंत पुलिस को बताए। वहीं लुटेरों के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी मुहैया करवाए जाने वाले का नाम जहां गुप्त रखा जाएगा, वहीं उसे 5 लाख का नकद ईनाम देने की घोषणा की गई है। इससे पहले भी सी.पी. अग्रवाल घुमारमंडी में 80 लाख का सोना लूटकर ले जाने वालों की जानकारी देने वाले को 1 लाख का ईनाम दिए जाने की घोषणा कर चुके हैं।  

मई 2008 में गिल रोड से ले गए थे 23 किलो सोना
इससे पहले मई 2008 में भी गिल रोड पर एक गोल्ड रखकर लोन देने वाली कंपनी से 23 किलो सोने के आभूषण ले गए थे। उस समय गोल्ड कंपनी के एक वर्कर की संलिप्ता पाई गई थी, जिसने रात के समय ब्रांच का एक गेट बंद नही किया था, लेकिन पुलिस की तरफ से 24 घंटे के भीतर ही केस सोल्व कर 100 प्रतिशत बरामदगी कर ली गई थी, अब देखना यह होगा कि इस मामले को सोल्व और रिकवरी करने में पुलिस को कितना समय लगेगा। 

कंपनी का सेफ्टी प्लान भी हुआ फेल
कंपनी की तरफ से सिक्योरिटी व सेफ्टी के चलते जो प्लान बनाया गया, वह भी लुटेरों के सामने फेल हुआ। वास्तव में जिस जगह गोल्ड व कैश रखने के लिए कंपनी स्ट्रॉन्ग रूम बनाती है, उसके बाहर कैमरा लगाया जाता है। इतना ही नहीं इलैक्ट्रॉनिक लॉक लगाया जाता है। जब भी ब्रांच के स्टाफ या मैनेजर की तरफ से डोर खोलना होता है तो उनकी तरफ से मुम्बई में कंपनी में फोन किया जाता है। फिर उनकी तरफ से कैमरे में यह देखा जाता है कि डोर के पास कोई अज्ञात व्यक्ति तो नहीं खड़ा। फिर मैनेजर को मोबाइल पर एक ओ.टी.पी. दिया जाता है, जिसे भरने के बाद इलैक्ट्रॉनिक लॉक खुलता है, लेकिन लुटेरों को यह पता था कि लाइट बंद होने पर इलैक्ट्रॉनिक लॉक काम नहीं करता और चाबी से डोर खोला जा सकता है। 

काम छोड़कर जा चुके स्टाफ की हो रही लिस्ट तैयार
पुलिस की तरफ से कंपनी से काम छोड़कर जा चुके स्टाफ की भी लिस्ट तैयार की जा रही है, ताकि पता चल सके कि फिलहाल सभी लोग कहां पर मौजूद हैं। वहीं पुलिस की तरफ से वारदात के समय एरिया का डम्प उठाया गया है, जिसमें सैंकड़ों मोबाइल नंबर आए हैं, जिन पर पुलिस की अलग टीम काम कर रही है।

2015 में भी गिल रोड पर गोल्ड लोन देने वाली कंपनी से हुई थी लूट
जुलाई 2015 में भी गिल रोड पर ही गोल्ड लोन देने वाली एक कंपनी में लूट हुई थी। उस समय 6 लुटेरे वारदात कर फरार हुए थे, जिन्होंने 14 किलो सोना व 2 लाख 25 हजार रुपए की नकदी लूटी थी। पुलिस ने कुछ समय बाद केस सॉल्व कर लिया था और 4 लुटेरों को दबोच कर 5 किलो सोना, 2 रिवाल्वर, 6 जिंदा कारतूस व 1 बाइक बरामद किया था। 


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