बढ़ने लगी बेरोजगारों की संख्या, ऑनलाइन पोर्टल पर 10 लाख से ज्यादा ने मांगी नौकरी

11/26/2020 10:31:02 AM

चंडीगढ़(हरिश्चंद्र): कोरोना से जहां पंजाब में अब तक 4500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं वहीं, लाखों रोजगार भी बेमौत दम तोड़ गए हैं। इस वजह से बेरोजगारी कितनी बढ़ी, इसका साफ अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 8 माह में सरकार के पोर्टल पर ‘घर-घर रोजगार’ के तहत करीब 10 लाख लोगों ने रोजगार के लिए आवेदन किया है।

इस पोर्टल पर औसतन सालभर में दो लाख लोग नौकरी के लिए आवेदन करते हैं मगर कोरोना के कारण कितने लोग बेरोजगार हुए हैं। 18 मई को राज्य में कर्फ्यू हटने के बाद पोर्टल पर आवेदनों की आई बाढ़ इसकी गवाही देती है। 25 नवम्बर तक पोर्टल पर 10,12,989 लोग आवेदन कर चुके हैं। इनमें महज 11,179 लोग ही ऐसे हैं जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा या 5वीं पास भी नहीं हैं। 3,995 5वीं, 58,181 8वीं और 1,56,846 10वीं पास लोगों ने सरकार से रोजगार इस पोर्टल के जरिए मांगा है।

ऐसा नहीं है कि इनमें सभी कम पढ़े-लिखे हैं। सरकारी आंकड़ों की मानें तो आवदेन करने वालों में 685 तो पी.एचडी. हैं, जबकि 91,280 पोस्ट ग्रैजुएट हैं। 2,12,937 आवेदकों के पास बी.ए., बी.कॉम या बी.एससी. की डिग्री है, जबकि 2,734 पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा होल्डर्स हैं। यह आंकड़ा पहली अप्रैल के बाद का है, जब राज्य में कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ था। इनके अलावा 12वीं पास 3,57,269 और 39,852 आई.टी.आई. पास ने भी रोजगार मांगा है। 10वीं के बाद डिप्लोमा करने वाले 21708 व 12वीं के बाद डिप्लोमा करने वाले 25,635 लोगों ने भी रोजगार की मांग की है।

कोरोना से पहले इनमें से कई लोग अच्छी-खासी नौकरी करते थे। कोई प्राइवेट स्कूल में टीचर था तो कोई कम्पनी में ठीकठाक ओहदे पर था। कोई डिलीवरी ब्वॉय था तो हैल्पर, कुक और वेटर का काम भी कई लोग करते थे। अब हालात यह हैं कि इनमें से कई ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे हैं, कोई फल-सब्जी बेच रहा है। कोरोना का कर्फ्यू में सबसे ज्यादा असर प्राइवेट स्कूलों, फैक्ट्रियों, होटलों और रैस्टोरैंट आदि पर पड़ा और सबसे ज्यादा नौकरियां भी इसी क्षेत्र में थीं। राज्य सरकार ने धीरे-धीरे होटल-रेस्तरां और फैक्ट्रियां खोलने-चलाने की अनुमति तो दी मगर इन क्षेत्रों में रोजगार वह मुकाम नहीं छू पाया, जो कोरोना से पहले था।

इन लोगों के लिए अब रोजगार का यह सरकारी पोर्टल ही उम्मीद की किरण है। उन्हें लगता है कि जिस तरह से पंजाब सरकार ने पहले भी घर-घर रोजगार योजना के तहत जॉब मेले लगा कर बेरोजगारों को नौकरी दिलाई थी, वैसे ही उनकी काबिलियत के हिसाब से उन्हें भी कोई न कोई नौकरी दिलाने का जरिया बनेगी मगर इस पोर्टल पर 25 नवम्बर को मात्र 8036 नौकरियां ही दिखाई दे रही हैं, जिनमें 2,476 सरकारी क्षेत्र और 5,560 निजी क्षेत्र में हैं। इन सरकारी नौकरियों में भी मात्र दो ही पंजाब में हैं, जबकि बाकी लखनऊ, पंचकूला, दिल्ली और उदयपुर आदि में हैं।

केंद्र और पंजाब सरकार को मिलकर काम करना होगा
सैंटर फॉर रिसर्च इन रूरल एंड इंडस्ट्रीयल डिवैल्पमैंट चंडीगढ़ के प्रो. आर.एस. घुम्मन का कहना है कि बेरोजगारी तो कोरोना से पहले भी बहुत गंभीर समस्या थी मगर कोरोना के कारण तो बहुत से लोगों की रोजी-रोटी ही चली गई है। इसका इन लोगों पर साइकोलॉजिकल प्रभाव पड़ा है और कई लोग तो डिप्रैशन का शिकार भी हुए होंगे। हालांकि पंजाब सरकार ने मोंटेक सिंह आहलूवालिया कमेटी को भी इसका जिम्मा सौंपा था, लेकिन उस कमेटी की रिपोर्ट में भी कुछ खास नहीं निकला।

इस बेरोजगारी के कारण स्टेट की अर्थव्यवस्था रुक गई है। इससे बाहर निकलने के लिए केंद्र और पंजाब सरकार को मिलकर काम करना होगा। पंजाब के पास इस पोर्टल के जरिए एक आंकड़ा तो आ ही गया है। केंद्र और पंजाब सरकार मिलकर उनके लिए पैकेज तैयार करें। जिन क्षेत्रों में बेकारी बढ़ी है, सरकार का मकसद पहले उन्हें रिवाइव करना होना चाहिए, ताकि वह फंक्शनल होकर दोबारा रोजगार जैनरेट करें। हमें अब कोरोना के साथ ही जिन्दगी जीने की आदत डालनी होगी, क्योंकि फिलहाल तो कोई तोड़ नजर नहीं आ रहा। मौजूदा माहौल में नौकरी तो दूर की बात, इन 10 लाख लोगों के सर्वाइवल का सवाल सामने खड़ा है। प्राइवेट स्कूल-कालेज, प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और कोचिंग सैंटर बंद हैं। उनका नॉन टीचिंग स्टाफ, बसों के ड्राइवर-हैल्पर आदि बेरोजगार हो गए हैं। सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों की पहचान कर उनको वित्तीय मदद देनी शुरू करे।
 


Sunita sarangal

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