10 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके प्रिंसिपलों को हटाने की मांग, AUCT ने उठाए बड़े सवाल
punjabkesari.in Friday, Aug 07, 2026 - 04:19 PM (IST)
लुधियाना (विक्की) : एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज टीचर्स (एयूसीटी) पंजाब और चंडीगढ़ ने उच्च शिक्षा डायरेक्टर कुलवंत सिंह पर पंजाब सरकार के नोटिफिकेशन का उल्लंघन होने के बावजूद चुप्पी साधने का आरोप लगाया है।
10 साल के लिए तय किया था प्रिंसिपल्स का कार्यकाल
एयूसीटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. तरुण घई और जनरल सेक्रेटरी प्रो. जसपाल सिंह ने बताया कि 8 जुलाई 2026 को उच्च शिक्षा डायरेक्टर कुलवंत सिंह के साथ हुई 1 घंटे की मीटिंग में पंजाब की तीन यूनिवर्सिटीज से जुड़े कॉलेजों में 10 साल से अधिक समय से कार्यरत प्रिंसिपल्स की अप्रूवल रद्द करने का मुद्दा उठाया गया था। संघ के नेताओं ने बताया कि पंजाब सरकार ने 30 जुलाई 2013 के नोटिफिकेशन के जरिए यूजीसी रेगुलेशन 2010 को अडॉप्ट किया था। इसके अनुसार किसी एफिलिएटेड कॉलेज के प्रिंसिपल्स का कार्यकाल अधिकतम 10 साल के लिए तय किया गया था। इस नियम में यह भी प्रावधान था कि प्रिंसिपल्स के रूप में कार्यकाल पूरा करने के बाद संबंधित व्यक्ति अपनी मूल संस्था में प्रोफेसर के पद और प्रोफेसर के पे स्केल में वापस जॉइन करेगा।
यूनिवर्सिटीज की लापरवाही के कारण नियमों की अनदेखी
प्रो. तरुण घई ने बताया कि पंजाब की यूनिवर्सिटीज के एफिलिएटेड और कांस्टीट्यूएंट कॉलेजों में 30 जुलाई 2013 के बाद नियुक्त किए गए कई प्रिंसिपल्स अपना 10 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। इसके बावजूद वे प्रिंसिपल्स के पद की शक्तियों और सैलरी का लाभ ले रहे हैं, जो पंजाब सरकार द्वारा अपनाए गए यूजीसी नियमों का सीधा उल्लंघन है। संघ ने डायरेक्टर से मांग की थी कि ऐसे प्रिंसिपल्स की अप्रूवल तुरंत प्रभाव से रद्द की जाए, उनकी ग्रांट बंद की जाए और संबंधित कॉलेजों में नए प्रिंसिपल्स की अपॉइंटमेंट की प्रक्रिया बिना किसी देरी के शुरू की जाए। प्रो. जसपाल सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटीज की लापरवाही के कारण नियमों की अनदेखी हुई है जिससे सरकार को भारी फाइनेंशियल नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद उच्च शिक्षा डायरेक्टर कुलवंत सिंह द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे पंजाब सरकार के शिक्षा क्रांति के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

