पंजाब में सिखों में हो रहा जब्री धर्म परिवर्तन बर्दाशत नहीं, अल्पसंख्यक आयोग ने शुरू करवाई जांचः इकबाल सिंह लालपुरा

10/17/2021 1:00:43 PM

जालंधर (रमनदीप सोढी) : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक कमीशन के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा कि देश में मुस्लिम, इसाई, पारसी, जैन, बौद्ध, सिख अल्पसंख्यक धर्म के लोगों की शिक्षा का विकास होना चाहिए और इनको ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी को प्राइमरी से पी.एच.डी. तक या विदेशों में जाकर एजुकेशन लेनी हो वह उन्हें स्कॉलरशिप व लोन उपलब्ध करवाएंगे। साथ ही बैंक में 20 लाख रुपए तक का लोन सिर्फ 6 प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवाएंगे। औरतों के लिए ब्याज दर 3 प्रतिशत रखी गई है। उन्होंने कहा कि भारत के विकास में हर व्यक्ति का बराबर का अधिकार होना चाहिए। 

राज्य में सिखों की स्थिति क्या है
चेयरमैन लालपुरा ने कहा कि सिख वर्ग भारत का एक अभिन्न अंग है। देश की सुरक्षा में भी बड़ा सिख धर्म के लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन सबके बावजूद पिछले 70 साल से इस वर्ग की तरफ से की जा रही मांग जिसमें दरियाई पानी, चंडीगढ़ और भाखड़ा डैम का कंट्रोल शामिल है, उसका मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है। आज जो किसानी रोष चल रहा है, यह पता नहीं चल रहा है कि यह किसानी एजीटेशन है या सिखों की है।  

केंद्रीय कृषि कानून 

उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों द्वारा सबसे ज्यादा खुदकशी हो रही है। अगर पंजाब सरकार किसानों की खुदकशी को रोक सकती तो केंद्र के इन कानूनों की कोई जरूरत ही नहीं थी। अगर हमारी राज्य सरकारें किसानों की जमीनों को बचाने में सक्षम होती तों इन कानूनों की कोई जरूरत ही नहीं है। 

जब्री धर्म परिवर्त्तन 

पंजाब में किए जा रहे जबरदस्ती धर्म परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि एक जांच चीफ सैक्रेटरी पंजाब को भेजी है। जिसमें पंजाब में जब्री लोगों के धर्म परिवर्तन बारे लिखा गया है। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती लोगों को क्रिश्चियन बनाया जा रहा है। इस बात का स्पैशल नोटिस लेकर कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब में 60 प्रतिशत सिख आबादी है। अगर सिखों के जबरदस्ती धर्म परिवर्तन किए गए तो वह उसकी भी जांच जरूर करवाएंगे। 

गज्जण सिंह के घर जाने पर विरोध
उन्होंने कहा कि वह न तो गज्जण सिंह के घर गए और न ही उनका कोई कार्यक्रम था। यह सारी अफवाहें हैं। अगर किसी धर्म के लोगों को कोई मुश्किलें है तो वे बेझिझक आकर उनके पास शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

विदेशी सिखों पर बोले

उन्होंने कहा कि जो सिख अफगानिस्तान से आए थे, वे यहां आकर काफी लंबा समय गुजर जाने के बाद भी इन्हें यहां की नागरिकता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि वह अकेले अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी सिखों की सुरक्षा बारे भी चिंतित हैं। अगर किसी धर्म के लोग जो हमारे विभाग के अंतर्गत नहीं भी आते हैं, हम उनकी भी मदद करने के लिए केंद्र सरकार से मिलकर उनको न्याय दिलाने की मांग करते हैं। हम उनके लिए भी अच्छे कदम उठाने वाले हैं। 

पंजाबी भाषा को प्रमोट करने पर बोले 

उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है कि पंजाब में पंजाबी को तीसरे नम्बर पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस सबकी जिम्मेदारी राज्य सरकार व एजुकेशन मिनिस्टर की बनती है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह राज्य में पंजाबी बोली को प्रमोट करे। हमें अपने सभ्याचार को प्रमोट करने का प्रयास करना चाहिए। स्कूलों में पंजाबी टीचरों की भर्तियां की जानी चाहिए। राज्य सरकार को इसके प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहिए।

बेरोजगारी चरम सीमा पर

उन्होंने कहा कि भारत में बेरोजगारी चरम सीमा पर है। हमारे देश में अकेले सिखों की बेरोजगारी संख्या 6.4 है। पंजाबी नौजवान रोजगार के लिए विदेश भाग रहे हैं। इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग बेरोजगारों को ट्रेनिंग देने के लिए तैयार है, लेकिन ग्राऊंड में काम करने के लिए तो लोग चाहिए। 

माइनिंग 

राज्य में माइनिंग मुख्य मुद्दा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में माइनिंग जोरों पर है। बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों से गुंडा टैक्स वसूल किया जा रहा है। 

सिंघू घटनाक्रम पर बोले

उन्होंने कहा कि सिख धर्म लोगों की रक्षा के लिए है। इस तरह से सड़कों पर कत्ल करना हमारे धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करता। यह बहुत ही दुखदायी घटना है। 

बेअदबी घटना पर

उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के हर मुकद्दमे का समय 90 दिन का होना चाहिए। 5-6 साल तक मुकद्दमों के फैसले न निकल पाना बहुत दुख का विषय है। कभी एक कमीशन बनाया गया तो कभी दूसरा कमीशन बनाया गया। अदालत में ही केस घूमता रहे, बेअदबी में जस्टिस रंजीत सिंह कमीशन का कुछ नहीं बना। अगर राज्य सरकार ही इन केसों को सुलझाने में असफल रहती है तो फिर केंद्र को इसमें हाथ डालना पड़ेगा।

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Content Writer

Sunita sarangal

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