शराब कारोबार में पंचकूला के व्यक्ति से करोड़ों का Fraud, आबकारी विभाग के ETO व इंस्पेक्टर सहित 5 नामजद

punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 08:52 AM (IST)

लुधियाना (राज): आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से शराब कारोबार में निवेश और साझेदारी के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। शातिर आरोपियों ने पंचकूला के एक व्यक्ति को चंडीगढ़ के शराब कारोबार में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का झांसा देकर न सिर्फ 10 करोड़ रुपये की ठगी का जाल बुना, बल्कि उसके पिता की करोड़ों रुपये की संपत्ति के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बिना उसकी जानकारी के 9 शराब ठेकों के लाइसेंस के लिए जमानत (गारंटी) के तौर पर इस्तेमाल कर लिया।

थाना मोती नगर की पुलिस ने पीड़ित की विस्तृत शिकायत और जांच के बाद दिल्ली के शराब कारोबारियों सहित आबकारी विभाग के एक ईटीओ (ETO) और इंस्पेक्टर समेत 5 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व साजिश रचने की संगीन धाराओं के तहत आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में निम्नलिखित पांच मुख्य आरोपियों को नामजद किया गया है अमित धल्ला (शराब कारोबारी, दिल्ली), सचिन धल्ला (शराब कारोबारी, दिल्ली), साहिल गर्ग (कारोबारी सहयोगी), रिशीपाल सिंह (ईटीओ, आबकारी एवं कराधान विभाग), जगबीर सिंह (आबकारी इंस्पेक्टर)

10 करोड़ में 10% हिस्सेदारी का दिया सब्जबाग

पुलिस को दी गई आधिकारिक शिकायत में पीड़ित नरिंदर कुमार, निवासी पंचकूला, हरियाणा ने बताया कि दिव्या उर्फ विक्की खन्ना नामक एक मध्यस्थ ने उससे संपर्क साधा था। उसने पीड़ित को बताया कि अमित धल्ला, सचिन धल्ला और साहिल गर्ग का चंडीगढ़ और आसपास के इलाकों में शराब का बड़ा सिंडिकेट है और शराब बाजार में उनका गहरा दबदबा है। आरोपियों ने नरिंदर कुमार को शराब कारोबार में 10 प्रतिशत की सीधी हिस्सेदारी देने की पेशकश की और इसके बदले 10 करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही व्यापारिक नियम व सॉल्वेंसी का हवाला देते हुए आरोपियों ने पीड़ित से 20 करोड़ रुपये की नेटवर्थ साबित करने और सिक्योरिटी के तौर पर अपनी व अपने पिता की संपत्ति के मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने की शर्त रख दी।

सुरक्षा के नाम पर रख लिए पिता की प्रापर्टी के दस्तावेज

नरिंदर कुमार के अनुसार, वह कारोबार की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के उद्देश्य से 12 अप्रैल 2025 को लुधियाना आया। यहां उसने अपने पिता की लुधियाना स्थित संपत्ति के नो-एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट और वैल्यूएशन रिपोर्ट हासिल करने के लिए आवेदन किया। आरोप है कि जैसे ही ये दस्तावेज तैयार हुए, आरोपितों ने "सिक्योरिटी और औपचारिकता" के नाम पर झांसा देकर ये तमाम मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए। इसके बाद पीड़ित जब भी शराब ठेकों के अलॉटमेंट, लाइसेंस और बिजनेस मॉडल की जानकारी मांगता, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। कुछ समय बाद जब आरोपियों ने उस पर दोबारा से 10 करोड़ रुपये कैश डालने का दबाव बनाना शुरू किया, तो पीड़ित को दाल में काला नजर आया और उसने इस पार्टनरशिप से अपने हाथ पीछे खींच लिए।

2.66 करोड़ का नोटिस आते ही पैरों तले खिसकी जमीन

इस महा-फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब हाल ही में नरिंदर कुमार के पते पर चंडीगढ़ आबकारी एवं कराधान विभाग की तरफ से 2.66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम रिकवरी नोटिस आ धमका। नोटिस देखकर पीड़ित के पैरों तले से जमीन खिसक गई। नोटिस में उसे शराब कारोबारी सचिन धल्ला से संबंधित शराब ठेके के लाइसेंस के लिए मुख्य 'जमानतदार' दर्शाया गया था। जब नरिंदर ने तुरंत आबकारी विभाग के रिकॉर्ड और फाइलों की बारीकी से पड़ताल करवाई, तो विभागीय मिलीभगत का घिनौना सच सामने आया।

बिना सहमति 9 शराब दुकानों की भर दी गारंटी, अधिकारियों पर सांठगांठ का आरोप

जांच में खुलासा हुआ कि पीड़ित और उसके पिता की सहमति और हस्ताक्षर के बिना ही उनकी निजी संपत्तियों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 9 शराब ठेकों (दुकानों) के लाइसेंस हासिल करने के लिए करोड़ों की सॉल्वेंसी गारंटी के रूप में इस्तेमाल किया जा चुका था। आरोप है कि आबकारी विभाग के ईटीओ रिशीपाल सिंह और इंस्पेक्टर जगबीर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए न तो दस्तावेजों की मौके पर तस्दीक की और न ही जमानतदार की भौतिक मौजूदगी व सहमति सुनिश्चित की, बल्कि शराब माफिया के साथ मिलीभगत कर फर्जी तरीके से कागजात पास कर दिए।

थाना मोती नगर में एफआईआर दर्ज, रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस

पीड़ित नरिंदर कुमार द्वारा पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए साक्ष्यों और प्राथमिक जांच के बाद थाना मोती नगर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी (Fraud), जाली दस्तावेज तैयार कर दुरुपयोग करने (Forgery) और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आबकारी विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड, 9 शराब ठेकों की लाइसेंस फाइलें, वैल्यूएशन रिपोर्ट्स और सॉल्वेंसी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया है। पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि इस सिंडिकेट में विभागीय स्तर पर और कौन-कौन से अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नामजद कारोबारियों और आबकारी अधिकारियों से जल्द पूछताछ की जाएगी और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होगी।

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News Editor

Kamini

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