Brain Tumor के मरीजों के लिए बड़ी उम्मीद! अब PGI में होगा सटीक इलाज

punjabkesari.in Friday, Oct 30, 2026 - 12:14 PM (IST)

चंडीगढ़ (पाल): ब्रेन ट्यूमर का इलाज अब सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है या स्कैन में कैसा दिखता है। ट्यूमर सेल्स में मौजूद मॉलिक्यूलर बदलाव भी बीमारी की पहचान करने, उसके संभावित नतीजों और इलाज की प्लानिंग करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। PGI में ब्रेन ट्यूमर के इलाज में मॉडर्न मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, एडवांस्ड इमेजिंग और सर्जिकल तकनीकों पर भी काम किया जा रहा है। इससे मरीज की बीमारी को बेहतर ढंग से समझने और जरूरत के हिसाब से इलाज का प्लान बनाने में मदद मिल रही है।

IDH म्यूटेशन, MGMT प्रमोटर मिथाइलेशन, 1p/19q को-डिलीशन और BRAF जैसे मार्कर ब्रेन ट्यूमर के मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस में अहम हैं। ये ट्यूमर के टाइप को बेहतर ढंग से क्लासिफाई करने और बीमारी के संभावित नतीजों का अनुमान लगाने में मदद करते हैं। कुछ मार्कर इलाज के ऑप्शन तय करने में भी काम आते हैं। हालांकि, हर मार्कर का रोल ट्यूमर के टाइप और मरीज की हालत के आधार पर अलग हो सकता है। PGI के न्यूरोसर्जरी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर राजेश छाबड़ा के मुताबिक, ब्रेन ट्यूमर का इलाज तेज़ी से बदल रहा है। अब, सिर्फ सर्जरी और रेडियोथेरेपी तक सीमित रहने के बजाय, मॉडर्न टेक्नोलॉजी, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और AI जैसी नई टेक्नोलॉजी को भी इलाज के प्रोसेस में शामिल किया जा रहा है।

मॉलिक्यूलर टेस्टिंग से बीमारी के बारे में जानकारी 

ब्रेन ट्यूमर के मरीज़ों में, MRI और दूसरे इमेजिंग टेस्ट से ट्यूमर की जगह, साइज और आस-पास के दिमाग पर उसके असर का पता चलता है। साथ ही, ट्यूमर टिशू की जांच और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग से उसके बायोलॉजिकल नेचर को समझने में मदद मिलती है। दोनों तरह की जानकारी को मिलाकर, डॉक्टर बीमारी का पता लगा सकते हैं और इलाज का प्लान तय कर सकते हैं। IDH म्यूटेशन कुछ तरह के ग्लियोमा को क्लासिफाई करने और उनके संभावित नतीजों को समझने में जरूरी हैं। MGMT प्रमोटर मिथाइलेशन कीमोथेरेपी के संभावित रिस्पॉन्स का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है, खासकर ग्लियोब्लास्टोमा जैसे ट्यूमर में। साथ ही, 1p/19q को-डिलीशन कुछ ग्लियोमा को क्लासिफाई करने में जरूरी है। BRAF में बदलाव कुछ तरह के ब्रेन ट्यूमर में टारगेटेड इलाज की संभावना से जुड़े हो सकते हैं।

एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ मरीज के खास इलाज पर फोकस

ब्रेन ट्यूमर का इलाज सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और कुछ मामलों में टारगेटेड ट्रीटमेंट से किया जाता है। किस मरीज को कौन सा इलाज दिया जाता है, यह ट्यूमर के टाइप, उसकी जगह, मॉलिक्यूलर प्रोफाइल और मरीज की पूरी हालत पर निर्भर करता है। इसीलिए मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और मॉडर्न इमेजिंग का महत्व बढ़ रहा है। ब्रेन ट्यूमर के मरीजो के इलाज के साथ-साथ PGI में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड इमेजिंग पर भी काम हो रहा है। इंस्टीट्यूट ड्यूरल-बेस्ड ब्रेन ट्यूमर के मरीजो की इमेजिंग पर हाई-क्वालिटी डेटा बनाने के लिए ICMR-सपोर्टेड प्रोजेक्ट चला रहा है। इसका मकसद भविष्य में AI-बेस्ड टूल्स बनाना है जो ट्यूमर की पहचान, इलाज की प्लानिंग और संभावित नतीजों का अनुमान लगाने में मदद कर सकें। मॉलिक्यूलर टेस्टिंग और नई टेक्नोलॉजी का मकसद बीमारी की खासियतों को समझना और हर मरीज को एक जैसा इलाज देने के बजाय बेहतर फैसले लेना है। हालांकि, इन टेस्ट के नतीजे मरीज की क्लिनिकल हालत और दूसरी रिपोर्ट पर विचार करने के बाद ही तय किए जाते हैं।

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News Editor

Kamini

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