खतरे की घंटी! पंजाब में तेजी से घट रहा भूजल स्तर, चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने
punjabkesari.in Thursday, Jun 25, 2026 - 06:44 PM (IST)
मोगा (गोपी राऊके) : एक तरफ जहां समय-समय पर पंजाब पर राज करने वाली प्रदेश सरकारों द्वारा हर वर्ष किसानों को रिवायती फसली चक्कर गेहूं तथा धान में से निकलकर विभिन्नता वाली फसलों की काश्त करने के लिए प्रेरित करने के बड़े दावे किए जाते हैं, परन्तु 1966 की हरित क्रांति के बाद पंजाब तथा खासकर मध्य मालवा के इस इलाके के लोगों को सरकारें रिवायती फसली चक्कर से निकालने में फेल साबित हुई हैं। हैरानी की बात, तो यह है कि सन 2000 से पानी की पेश आने लगी किल्लत के बाद गहरे बोरवैलों वाली मोटरों के चाहे सबमर्सिबल पंप लगाकर किसानों ने बदलवां प्रबंध कर लिया है परन्तु राज्य में 14 लाख से ज्यादा लगी खेती मोटरों में से अंधाधुंध निकल रहा पानी पंजाब को बंजर बनाने की तरफ बढ़ा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि मोगा जिले में आज से 10 साल पहले जब सेवामुक्त खेतीबाड़ी मुख्य ऑफिसर डा. जसविन्द्र सिंह बराड़, डॉ. कुलदीप सिंह बुट्टर, डॉ. हरनेक सिंह रोडे जैसे वातावरण प्रेमी ऑफिसर थे, तो उन्होंने अपनी नौकरी की जगह पर फर्ज समझकर जिले के किसानों को फसली विभिन्नता के रास्ते अग्रसर किया तथा बड़े स्तर पर जिले के किसान धान की सीधी बिजाई भी करने लगे थे परन्तु अब खेतीबाड़ी विभाग से जो ब्यौरे प्राप्त हुए हैं, उस अनुसार समूचे रकबे में से बहुत नाममात्र रकबा ही सीधी बिजाई को तरजीह दे रहा है। पिछले वर्ष 2025 में सिर्फ 558 हैक्टेयर रकबे में धान की सीधी बिजाई हुई थी जबकि पिछले सप्ताह शनिवार तक इस वर्ष 2026 में भी 670 हैक्टेयर रकबे में ही सीधी बिजाई हुई है।
आलूओं के बाद मक्की की बिजाई ने धरती निचला पानी किया कम
पता लगा है कि रिवायती फसलों की बजाए धान से पहले मक्की की काश्त करने वाले किसानों को चाहे कुछ आर्थिक समर्थन तो मिला है परन्तु मक्की ने भी धरती निचला पानी कम कर दिया है। गांव किशनपुरा दानूवाल के किसान जसमत्त सिंह मत्ता ने संपर्क करने पर माना कि मक्की पानी ज्यादा मांगती है। उन्होंने कहा कि परन्तु मूंगी की फसल बारिश के दिनों में खराब होने के कारण किसानों ने मक्की का रुख किया है।
आखिरकार क्यों किसानों ने विभिन्नता वाली फसल से की तौबा
गेहूं तथा धान की तरह बाकी फसलों पर सरकारी खरीद की कोई गारंटी नहीं है। इस वर्ष किसानों ने आलूओं तथा मूंगी की फसल में बड़ा नुकसान झेला है। किसानों को आर्थिक नुकसान का डर रहता है। सब्जियां, फल की काश्त करने वाले किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज जरूरी नहीं है। मार्कीट में भी अनिश्चिता होती है। यही नहीं, खेतीबाड़ी विभाग द्वारा भी जरूरी तकनीकी जानकारी किसानों तक पहुंचती नहीं की जाती तथा न ही अभी तक फसल बीमा योजना का समूचे किसानों तक लाभ पहुंचा है।
खेतीबाड़ी विभाग ने न चलाई कोई जागरूकता मुहिम
यहां यह जिक्रयोग है कि एक दशक धान की फसल से पहले जिला खेतीबाड़ी विभाग द्वारा किसानों को बदलवीं फसलों की काश्त करने पर सीधी बिजाई करने के लिए प्रेरित करने के लिए किसानों के खेतों तक सीधी पहुंच की जाती थी परन्तु पिछले तथा इस साल खेतीबाड़ी विभाग की कोई सरगर्मी देखने को नहीं मिली है। जिस कारण किसानों ने अपने स्तर पर सीधी बिजाई का रुख किया है।
चूहों ने सीधी बिजाई करने वाले किसानों का मोह किया भंग : जगदीप सिंह बराड़
गांव ददाहूर के पूर्व सरपंच तथा किसान जगदीप सिंह बराड़ का कहना था कि चूहों ने सीधी बिजाई करने वाले किसानों का मोह भंग कर दिया है। उन्होंने कहा कि नदीनों का हल तो किसानों द्वारा स्प्रे द्वारा किया जाता है, पर चूहों के नुकसान ने किसानों के हाथ खड़े करवा दिए हैं।
हर बार की तरह न उठाया मुख्य खेतीबाड़ी अफसर ने फोन
इसी दौरान बार-बार संपर्क करने पर आज भी मुख्य खेतीबाड़ी ऑफिसर डा. अमृतपाल सिंह ने फोन नहीं उठाया तथा न ही मैसेज का कोई जवाब दिया, जिस कारण उनके साथ डार्क जोन घोषित किए जा चुके मोगा जिले के ब्लाकों में लगातार गहरे हो रहे पानी को बचाने के खेतीबाड़ी विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों संबंधी बातचीत नहीं हो सकी।
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