पंजाब कांग्रेस में कलह खत्म कराने के लिए हाईकमान का मास्टर प्लान, अब चन्नी, रंधावा और वड़िंग होंगे आमने-सामने!
punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 09:47 AM (IST)
चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे अंदरूनी कलह को खत्म करने के लिए कांग्रेस हाईकमान अब सीधे हस्तक्षेप की तैयारी में है। राहुल गांधी की इस महीने संभावित पंजाब यात्रा से पहले राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस बैठक का मकसद सिर्फ चुनावी रणनीति तैयार करना नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस में बढ़ रही गुटबाजी पर 'डैमेज कंट्रोल' करना भी है।
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए अपनी जमीन तैयार कर रही है। हालांकि, पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी दलों से ज्यादा अपने नेताओं को एकजुट रखना बनती जा रही है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या हाईकमान चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं को एक मंच पर लाकर कोई साझा फार्मूला तैयार कर पाएगा। अगर राहुल गांधी की संभावित 15 सितंबर की पंजाब यात्रा से पहले यह बैठक होती है, तो इसे पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी कलह को शांत करने की दिशा में हाईकमान का बड़ा कदम माना जाएगा।
राहुल गांधी के पंजाब दौरे को लेकर दिल्ली में बैठक
गुरुवार को नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी की प्रस्तावित पंजाब यात्रा को लेकर चर्चा की गई। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने भी पुष्टि की है कि राहुल गांधी की यात्रा का प्रस्ताव उनके कार्यालय को भेजा गया है और इसकी तारीख जल्द तय की जाएगी। फिलहाल 15 सितंबर के आसपास राहुल गांधी के पंजाब आने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि राहुल गांधी के पंजाब पहुंचने से पहले प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के बीच कम से कम राजनीतिक तालमेल कायम हो जाए। इसी कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य नेताओं को दिल्ली बुलाए जाने की संभावना है।
लंबे समय से सामने आ रहे नेताओं के मतभेद
यह बैठक पंजाब कांग्रेस के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। लंबे समय से प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता हासिल करने की तैयारी में जुटी है। ऐसे में राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान पार्टी की अंदरूनी खींचतान सार्वजनिक न हो, यह हाईकमान की प्राथमिकता हो सकती है। हाईकमान चाहती है कि राहुल गांधी पंजाब में पार्टी नेताओं के साथ एक मंच पर नजर आएं और कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि कांग्रेस आंतरिक मतभेदों से ऊपर उठकर चुनावी जंग के लिए तैयार है।
बड़े संगठनात्मक फैसलों के संकेत
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस को लेकर कुछ बड़े संगठनात्मक फैसले भी लिए जा सकते हैं। हालांकि, अभी इन फैसलों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जिस तरह हाईकमान ने पंजाब के अलग-अलग गुटों से संपर्क बढ़ाया है, उससे संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए कोई बड़ी कवायद कर सकती है। अब देखना होगा कि दिल्ली में होने वाली बैठकों से पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच राजनीतिक दूरियां कम होती हैं या गुटबाजी 2027 के चुनाव तक पार्टी के लिए चुनौती बनी रहती है।

