महिलाओं की सरकारी योजनाओं के लिए वोटर ID जरूरी करने पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब

punjabkesari.in Tuesday, Sep 29, 2026 - 11:42 AM (IST)

चंडीगढ़ (गंभीर): पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से मुख्यमंत्री 'मावां-धीयां सत्कार योजना' के तहत फायदे देने के लिए वोटर ID कार्ड जरूरी करने के पीछे का मकसद साफ करने को कहा है। यह स्कीम महिलाओं को महीने की इनकम में मदद देने के लिए एक फाइनेंशियल मदद स्कीम है। चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने स्कीम को चुनौती देने वाली एक पिटीशन पर सुनवाई के बाद क्लैरिफिकेशन मांगा, जिसके बारे में कहा गया था कि इसका एकमात्र मकसद पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के पक्ष में वोट हासिल करना है। स्कीम का फायदा उठाने के लिए पंजाब राज्य का वोटर ID कार्ड जरूरी होना साफ दिखाता है कि इसका मकसद सिर्फ फायदा उठाने वालों से वोट हासिल करना है।

मामले को 5 अक्टूबर तक टालते हुए कोर्ट ने कहा कि पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल पिटीशनर की बात का विरोध करते हैं और स्कीम के तहत फायदे देने के लिए वोटर ID कार्ड को जरूरी बनाने के मकसद को साफ करने और निर्देश मांगने के लिए स्थगन की मांग करते हैं। इस स्कीम के तहत, जनरल कैटेगरी की बेनिफिशियरी महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये मिलते हैं, जबकि शेड्यूल्ड कास्ट की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। इस स्कीम को हरबख्श चैरिटेबल सोसाइटी की PIL के जरिए चुनौती दी गई है।

यह तर्क दिया गया है कि हालांकि वोटर ID कार्ड पहचान के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स में से एक हो सकता है, लेकिन स्कीम के तहत फ़ायदे देने के लिए इसे जरूरी बनाने से इसका मकसद साफ होता है, यानी वोट पाने के बदले में एक ट्रांज़ैक्शन के तौर पर काम करना। PIL में कहा गया है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रति अपनी कानूनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए कोर्ट के सामने बार-बार पैसे की तंगी का हवाला देती है, फिर भी वह अपनी मर्ज़ी से सब्सिडी या मुफ़्त स्कीमों पर भारी खर्च करती रहती है। पिटीशनर के अनुसार, यह तरीका पब्लिक रिसोर्स के मनमाने और बिना सोचे-समझे बंटवारे को दिखाता है और फ़ाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी, गुड गवर्नेंस और पब्लिक मनी का सही और बिना किसी मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने की संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दे उठाता है।

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News Editor

Kamini

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