आखिर क्यों चुप भगवंत मान? खैहरा ने बेनकाब की आप सरकार की  ‘Zero Tolerance’ नीति

punjabkesari.in Tuesday, Mar 24, 2026 - 04:07 PM (IST)

पंजाब डेस्क : सीनियर कांग्रेस नेता और विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने आज पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला किया, और उनके मशहूर ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ को पूरी तरह झूठ और धोखा बताया।

खैरा ने खुलासा किया कि BDPO नडाला कुलविंदर रंधावा के खिलाफ 2022 में BDPO ढिलवां के तौर पर पोस्टिंग के दौरान 20 लाख रुपये के भ्रष्टाचार की एक गंभीर शिकायत 4 मार्च, 2026 को औपचारिक रूप से विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर को दी गई थी। हैरानी की बात है कि आज तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उक्त अधिकारी एक आदतन अपराधी है, जिसे पहले BDPO अमलोह और खन्ना के तौर पर पोस्टिंग के दौरान विजिलेंस ब्यूरो ने दो बार सस्पेंड और गिरफ्तार किया था। AAP सरकार के दोहरे रवैये को और उजागर करते हुए खैहरा ने बताया कि 2024 में 40 लाख रुपये के भ्रष्टाचार घोटाले में उक्त भ्रष्ट BDPO कुलविंदर रंधावा को सस्पेंड और गिरफ्तार करवाने वाला कोई और नहीं बल्कि आप विधायक अमलोह गैरी वड़िंग था। इसी तरह, आप विधायक खन्ना तरनप्रीत सिंह सोंध ने 2023 में उसी अधिकारी के खिलाफ 60 लाख रुपये के एक और घोटाले का पर्दाफाश किया था और उस समय उसे सस्पेंड भी करवाया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2025 में ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री बनने के बाद, उसी तरनप्रीत सिंह सोंध ने इस दागी अधिकारी को बहाल करने में मदद की, जिससे राजनीतिक बेईमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर सरकार की असली मंशा पर गंभीर सवाल उठे हैं।

खैरा ने कहा कि यह घटना भ्रष्ट अधिकारियों और राजनीतिक संगठनों के बीच खतरनाक गठबंधन को साफ तौर पर उजागर करती है और यह सवाल उठाती है कि भ्रष्टाचार के साबित आरोपों वाला एक अधिकारी कैसे बिना किसी रोक-टोक के अपनी कुर्सी पर बैठा है।  खैहरा ने टिप्पणी करते हुए कहा, “क्या यही ‘जीरो टॉलरेंस’ है जिसका भगवंत मान प्रचार करते रहते हैं? या तो मुख्यमंत्री को इस बारे में पता नहीं है, जो उनकी असमर्थता दिखाता है या वह जानबूझकर भ्रष्ट अधिकारियों को बचा रहे हैं।”

उन्होंने मांग की :

सीनियर कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा ने भ्रष्ट BDPO नडाला के मामले में पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए चार अहम मांगें रखीं। खैहरा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर ईमानदारी से अमल कर रही है, तो उसे बिना देरी ठोस कदम उठाने चाहिए।

खैहरा ने सबसे पहले मांग की कि संबंधित BDPO के खिलाफ तुरंत विजिलेंस केस दर्ज किया जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष और कानूनी जांच हो सके। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक उक्त अधिकारी को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए, जिससे सबूतों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश न रहे।

इसके अलावा उन्होंने इस अधिकारी की बहाली किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। खैहरा ने कहा कि बार-बार भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद ऐसे अधिकारी को दोबारा जिम्मेदारी देना बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

अंत में खैहरा ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग से दागी अधिकारियों को प्रमोट या बहाल करने के मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण खत्म नहीं होगा, तब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई केवल नारेबाजी ही बनी रहेगी।

खेहरा ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक बार फिर साबित हो जाएगा कि आप सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने के बजाय उसे बचाने में मिली हुई है। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग जवाब चाहते हैं। ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा चुनिंदा कार्रवाई और राजनीतिक बेईमानी का बहाना नहीं बनना चाहिए।” खहरा ने आखिर में कहा कि जब तक न्याय नहीं हो जाता और भ्रष्ट लोग बेनकाब नहीं हो जाते, वह हर मंच पर यह मुद्दा उठाते रहेंगे।

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News Editor

Urmila

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