लुधियाना कोर्ट में बड़ा हादसा टला: लिफ्ट में फंसे 17 लोगों को वकीलों ने बचाया
punjabkesari.in Wednesday, Apr 15, 2026 - 05:01 PM (IST)
लुधियाना (राज): महानगर के जिला अदालत परिसर में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक पब्लिक लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बीच में ही रुक गई। इस हादसे के दौरान लिफ्ट में 2 वकीलों और 1 पुलिसकर्मी समेत कुल 17 लोग सवार थे, जो करीब 20 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझते रहे।
लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में अटकी
गनीमत यह रही कि मौके पर मौजूद दो वकीलों ने अपनी जान पर खेलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को रोजाना की तरह कोर्ट परिसर में कामकाज चल रहा था। इसी दौरान पब्लिक लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में अटक गई। लिफ्ट के अंदर जगह कम और लोग ज्यादा होने के कारण अंदर दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो गई। अंदर फंसे लोग घबराहट में शोर मचाने लगे और मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन काफी देर तक कोई भी तकनीकी सहायता मौके पर नहीं पहुंची। जब लिफ्ट के अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें बाहर आईं, तो वहां मौजूद एडवोकेट परमिंदर सिंह कुक्की और एडवोकेट राहुल शर्मा ने बिना समय गंवाए कमान संभाल ली।
20 मिनट तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
प्रशासन या मैकेनिक का इंतजार करने के बजाय, दोनों वकीलों ने खुद ही राहत कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने सुरक्षाकर्मियों की मदद ली और भारी मशक्कत के बाद लिफ्ट के दरवाजों को जबरन खोलने में कामयाबी हासिल की। दरवाजे थोड़े से खुलने के बाद वकीलों ने एक-एक करके सभी 17 लोगों को बाहर खींचना शुरू किया। करीब 20 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर एडवोकेट कुक्की और राहुल शर्मा समय पर हिम्मत न दिखाते, तो लिफ्ट के अंदर ऑक्सीजन की कमी से कोई बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद वकीलों और आम जनता में कोर्ट परिसर की लिफ्टों की मेंटेनेंस को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि इतने संवेदनशील स्थान पर लिफ्टों का इस तरह खराब होना प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। फिलहाल इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है, लेकिन इसने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

