सिगरेट के बिना भी युवाओं को जकड़ रहा फेफड़ों का कैंसर, विशेषज्ञों ने किया बड़ा खुलासा

punjabkesari.in Thursday, Apr 23, 2026 - 12:29 PM (IST)

अमृतसर (दलजीत): फेफड़ों के कैंसर को लेकर दुनिया भर में एक नया और चिंताजनक रुझान सामने आया है, जिसने मेडिकल विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा खोज के अनुसार अब यह बीमारी केवल सिगरेट पीने वालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिना सिगरेट पीने वाले युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। यू.एस.सी. नॉरिस कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर और केक मेडिसिन द्वारा किए गए अध्ययन में 50 वर्ष से कम उम्र के 187 मरीजों का विश्लेषण किया गया। परिणाम चौंकाने वाले थे कि इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जिन्होंने अपने जीवन में कभी सिगरेट नहीं पी। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह सामने आई कि युवा महिलाओं में इस बीमारी का खतरा पुरुषों की तुलना में अधिक पाया गया।

अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि कई मरीज नियमित रूप से स्वस्थ आहार (फल, सब्जियां और साबुत अनाज) का सेवन करते थे। विशेषज्ञों के अनुसार वायु प्रदूषण, जहरीले रसायन, धूल और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े अन्य अनदेखे कारक इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। यह शोध इस ओर संकेत करता है कि फेफड़ों के कैंसर की रोकथाम के लिए अब केवल धूम्रपान से दूरी बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय कारकों पर भी गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।

मरीजों को अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए 

सरकारी मेडिकल कॉलेज के एम.डी.आर. कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी डॉ. संदीप महाजन ने बताया कि यह खुलासा स्पष्ट करता है कि फेफड़ों का कैंसर अब केवल सिगरेट से जुड़ा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि छाती रोग से संबंधित मरीजों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

युवा महिलाओं में बढ़ते मामले गंभीर संकेत 

सरकारी टी.बी. अस्पताल के सीनियर डाक्टर विशाल वर्मा ने बताया कि युवा महिलाओं में बढ़ते मामले बेहद गंभीर संकेत हैं। उन्होंने कहा कि इसमें हार्मोनल और पर्यावरणीय कारणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लक्षणों को हल्के में न लें 

सरकारी टी.बी. अस्पताल के डा. तुषार बांसल ने बताया कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। लंबे समय तक खांसी, छाती में दर्द या सांस लेने में तकलीफ को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। केवल स्वस्थ खान-पान पर्याप्त नहीं है, बल्कि साफ हवा और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

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News Editor

Kalash

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