ऑनलाइन गेमिंग की लत: युवाओं के लिए खतरे की घंटी
punjabkesari.in Sunday, Feb 01, 2026 - 02:43 PM (IST)
संगरूर/बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): युवाओं के लिए ऑनलाइन गेम किस प्रकार जानलेवा साबित हो रही है, इसके चर्चे मीडिया व सोशल मीडिया में कई बार सामने आते रहते हैं। यह एक ऐसा मायाजाल है जिसमें एक बार फंसने के बाद निकलना मुश्किल हो जाता है। इस धंधे में लगे लोग इतने शातिर हैं कि वे पहले युवाओं में मात्र खेल खेलने की आदत डालते हैं और फिर गेम को जीतने के लिए ऐसे लुभावने ऑफर देते हैं कि युवाओं को यह पता ही नहीं चलता कि वे ऑनलाइन गेम रूपी नशे की दलदल में कब फंस गया। जब तक उसे होश आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
यह कोई नई बात नहीं है कि केंद्र व प्रदेश की सरकारों को इस बारे में पता नहीं है। सरकारें अपने स्तर पर इस पर अंकुश लगाने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाती हैं, परंतु ऑनलाइन गेम एप्स के संचालक युवाओं को अपने जाल में फंसा ही लेते हैं। वहीं, शुरू-शुरू में युवा इसे मात्र खेल के नजरिए से देखते हैं, लेकिन जब ऑनलाइन गेम्स एप लुभावने टास्क देती हैं तो युवा उन्हें पूरा करने के लिए अपने व परिवार के पैसे भी बर्बाद कर देते हैं।
कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें युवा ऑनलाइन गेम के चक्कर में अपनी जमा पूंजी सहित संपत्ति तक गंवा चुके हैं। वहीं कई युवा मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसे गलत कदम तक उठा लेते हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी जागरूक होने की जरूरत है।
ऑनलाइन गेमिंग के खतरों की जानकारी आवश्यक
अजैब सिंह जवंधा ने इस गंभीर मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को इस धंधे को चलाने वाले और इसका प्रचार-प्रसार करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसी सोशल साइट्स भी बैन होनी चाहिएं, जो इस धंधे को प्रमोट कर रही हैं। जवंधा ने सुझाव दिया कि स्कूलों, कॉलेजों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता शिविर लगाकर ऑनलाइन गेमिंग के खतरों की विस्तृत जानकारी देनी चाहिए, ताकि युवा इसकी भयावहता को समझ सकें और इस जाल में फंसने से बच सकें।
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