Punjab में 10,000 करोड़ के धान खरीद घोटाले की चर्चा, केंद्र ने दिए जांच के आदेश, पंजाब सरकार से मांगी रिपोर्ट
punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 11:57 AM (IST)
जालंधर : पंजाब में धान खरीद को लेकर बड़े घोटाले के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। आरोप है कि 2025–26 सीजन के दौरान राज्य की मंडियों में फर्जी खरीद के जरिए लगभग ₹6,000 से ₹10,000 करोड़ तक का खेल हुआ।
मामले की शिकायत संगरूर के एक कमीशन एजेंट-cum-राइस मिल मालिक की ओर से की गई बताई जा रही है। आरोपों के मुताबिक मंडियों में कमीशन एजेंटों ने किसानों के नाम पर फर्जी ‘जे’ फार्म जारी किए। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किसानों के खातों में दिखाया गया, लेकिन असल में पैसा किसानों, एजेंटों, राइस मिलरों और खरीद एजेंसियों से जुड़े कुछ कर्मचारियों के बीच बांट लिया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाद में सस्ता धान दूसरे राज्यों से लाया गया, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से करीब ₹600 प्रति क्विंटल कम दर पर खरीदा गया। इसे पंजाब में MSP पर खरीदा गया दिखाकर पूरा भुगतान उठा लिया गया।
कथित तौर पर प्रक्रिया ऐसे चली कि एजेंट ने गेट पास जारी कर धान को राइस मिल में ट्रांसफर दिखाया। मिलर ने बिना धान प्राप्त किए ही कागजों में उसकी रसीद दर्ज कर दी और बदले में नकद ले लिया। शिकायत के अनुसार एजेंट को ₹45 प्रति क्विंटल कमीशन और ₹55 मंडी खर्च मिला। खरीद एजेंसी के स्टाफ और मंडी बोर्ड कर्मचारियों को भी प्रति क्विंटल अलग-अलग रकम मिलने का आरोप है।
इतना ही नहीं, कुछ मिलरों और एजेंटों पर यूपी और बिहार से धान लाकर स्टॉक की कमी पूरी करने और टैक्स व लेवी से बचने के भी आरोप लगे हैं। खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद एजेंसियों और एफसीआई के फील्ड स्टाफ ने भौतिक सत्यापन के नाम पर कागजी स्टॉक दिखाया, जबकि असल में गोदामों में धान मौजूद नहीं था। शिकायत में कहा गया है कि इसके लिए हर राइस मिल से ₹10,000 से ₹30,000 तक वसूले गए।
एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि 290 क्विंटल की एक फर्जी खेप से ही राइस मिलर को करीब ₹4 लाख का फायदा हो जाता है। पूरे सीजन में लाखों टन धान की खरीद को देखते हुए घोटाले की रकम बहुत बड़ी हो सकती है। केंद्र के राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय की ओर से पंजाब के मुख्य सचिव को निर्देश भेजे गए हैं। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी जिलों के डीएफएससी को अलॉटमेंट कमेटियों की बैठक बुलाकर जांच करने और 13 फरवरी तक रिपोर्ट भेजने को कहा है।
वहीं विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिकायत अब तक अप्रमाणित है और विभाग की सख्त व्यवस्था के कारण बड़े पैमाने पर फर्जी खरीद की संभावना कम है। फिर भी सभी खरीद की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी। शिकायत में यह भी जिक्र है कि पिछले साल बाढ़ और अधिक नमी के कारण पैदावार पर असर पड़ा था, जिसका फायदा उठाकर इस तरह की गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया। अब देखना होगा कि जांच में कितनी सच्चाई सामने आती है।
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