''Easy Registration'' बनी Botheration, पंजाब सरकार के डिजिटल दावों को कोसते नजर आते हैं लोग
punjabkesari.in Friday, Feb 20, 2026 - 10:37 AM (IST)
जालंधर (चोपड़ा): पंजाब सरकार ने “ईजी रजिस्ट्रेशन” प्रणाली को डिजिटल रेवोल्यूशन के रूप में पेश करते हुए दावा किया था कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजी प्रक्रिया अब पारदर्शी, सरल और समयबद्ध होगी और आम लोगों को दलालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और न ही सरकारी दफ्तरों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ेगा लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। “ईजी रजिस्ट्रेशन” की पेचीदगियों ने जनता को अनावश्यक बिजी कर दिया है।
मौजूदा समय में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री पहले से अधिक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया बन गई है। आवेदक ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान बार-बार तकनीकी अड़चनों का सामना कर रहे हैं। नतीजतन, लोग आज भी डीड राइटरों, वकीलों और एजैंटों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

सरकार ने दावा किया था कि मात्र 500 रुपए की फीस देकर ‘सेल डीड’ ऑनलाइन या सेवा केंद्रों के माध्यम से तैयार करवाई जा सकती है। हैल्प डैस्क और डीड असिस्टैंट काउंटर भी स्थापित किए गए, ताकि लोग बिना बिचौलियों के अपना काम करा सकें। परंतु वास्तविकता यह है कि तकनीकी जटिलताओं के कारण आम व खास लोगों ने हेल्प डेस्क से पूरी तरह से किनारा कर रखा है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सब रजिस्ट्रार कार्यालय जालंधर-1 और जालंधर-2 में रोजाना 200 रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेजों को ऑनलाइन अप्रूवल मिलती है तो दोनों कार्यालयों में स्थापित अलग-अलग हैल्प डैस्क के माध्यम में 10 डाक्यूमैंट भी ऑनलाइन अप्लाई नहीं हो पा रहे हैं।
फर्स्ट इन फर्स्ट आऊट सिस्टम में खड़ी की नई परेशानियां
हाल ही में लागू फर्स्ट इन फर्स्ट आउट (फीफो) सिस्टम ने नई परेशानियां खड़ी कर दी हैं। इसके तहत ज्वाइंट सब रजिस्ट्रार से ऑनलाइन अप्रूवल लेने के बाद आवेदक को निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर टोकन लेना अनिवार्य है। इसी क्रम में दस्तावेजों की प्रोसेसिंग होती है। व्यवहारिक तौर पर यह व्यवस्था कई बार ठप हो जाती है। यदि किसी एक दस्तावेज में तकनीकी या कानूनी आपत्ति आ जाए, तो उसके बाद की सभी फाइलों की प्रक्रिया रुक जाती है। एक व्यक्ति की समस्या के कारण दर्जनों आवेदकों का समय बर्बाद होता है।
टोकन सिस्टम के बावजूद करना पड़ता है लंबा इंतजार
फीफो लागू होने के बाद टोकन काऊंटर को लेकर भी दिक्कतें सामने आईं। कुछ लोग टोकन लेकर चले जाते थे, जिससे प्रक्रिया बाधित होती थी। बाद में टोकन काऊंटर को कार्यालय के भीतर शिफ्ट किया गया, ताकि खरीदार, विक्रेता, गवाह और नंबरदार एक साथ उपस्थित रहें। इसके बावजूद यदि कोई दस्तावेज अधूरा निकले या गवाह अनुपस्थित हो, तो पूरी प्रक्रिया अटक जाती है और अन्य लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में लोग अपनी बारी के इंतजार को लेकर लंबा समय वेटिंग हॉल में बैठ सरकार की इजी रजिस्ट्रेशन सिस्टम को कोसते नजर आते है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में एजेंटों की फिर बढ़ी सक्रियता
जिस प्रणाली को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने का माध्यम बताया गया था, वही अब एजेंटों के लिए अवसर बनती दिख रही है। पोर्टल की जटिलताओं से परेशान लोग एजेंटों की शरण ले रहे हैं। कार्यालय परिसर के आसपास सक्रिय तथाकथित डीड राइटर और एजेंट दावा करते हैं कि वे “सिस्टम समझते हैं” और फाइल जल्दी निपटा देंगे। इसके बदले में मोटी रकम ली जाती है।
सरकार डिजिटल दावों पर उठे सवाल
ईजी रजिस्ट्रेशन का उद्देश्य पारदर्शिता और समय की बचत था, लेकिन मौजूदा हालात में यह व्यवस्था आम जनता के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। पहले 48 घंटों में ऑनलाइन अप्रूवल फिर अगले दिन ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट और अन्य पेचीदगियों को चलते रजिस्ट्री, पावर ऑफ अटॉर्नी, वसीयत, तबदील मलकियत जैसे दस्तावेजों की ऑनलाइन अप्रूवल लेनी हो तो 4 से 5 दिनों का समय लग रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक सिस्टम को सरल, लचीला और जनहितैषी नहीं बनाया जाएगा, तब तक “ईजी रजिस्ट्रेशन” का उद्देश्य अधूरा रहेगा और आम लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ती रहेंगी।
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