संघ के ‘मुख’ से गायब होने लगे ‘राम’, हैरत में पड़े लोग

11/9/2020 11:50:49 AM

जालंधर (पाहवा): 6 अगस्त 2020 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डा. मोहन भागवत की तरफ  से लिखित एक संबोधन किया गया जिसमें उन्होंने कहा कि सबके राम हैं और सब में राम हैं लेकिन लगता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ धीरे-धीरे अब राम नाम से दूर होने लगा है। यह बात कई लोगों को अजीब लगेगी लेकिन यह सत्य है। जो लोग इसका प्रमाण तलाश रहे हैं, उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पथिक संदेश को पढ़ कर काफी कुछ ज्ञान हो जाएगा। 

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संघ के मुखपत्र पथिक संदेश में इस बार दीपावली विशेषांक के नाम से संस्करण जारी किया गया है। हैरत की बात है कि पूरे संस्करण में दीपावली से संबंधित हिंदू देवी-देवताओं की कोई फोटो ही नहीं लगाई गई तथा न ही उन पर कोई आर्टिकल लिखा गया। यह बात काफी हैरान कर देने वाली है कि दूसरे धर्मों का आदर व सम्मान करने वाला यह संगठन अपने धर्म से कैसे दूर हो गया। संघ के इस मुखपत्र में दीपावली के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के आला नेताओं ने विज्ञापन लगाकर अपनी हाजिरी लगवा दी लेकिन शायद इन लोगों को भी समझ नहीं आ रहा होगा कि भगवान राम के नाम पर संगठन चलाने वाला संघ आखिर भगवान राम का चित्र लगाना क्यों भूल गया।


क्या भगवान राम के प्रति संगठन की आस्था केवल ‘रणनीति’ का हिस्सा?
दिलचस्प बात है कि संघ ने अपने मुखपत्र में दीपावली पर एक पेज का आर्टिकल तो प्रकाशित किया है लेकिन उस आर्टिकल में भी भगवान राम, माता लक्ष्मी या भगवान गणेश की कोई फोटो नहीं लगाई जो चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि संघ वैसे तो भगवान के नाम पर अपनी राजनीति चलाता है लेकिन जब भगवान राम से संबंधित किसी पर्व पर विशेषांक दे रहा है तो उसमें उनकी फोटो न लगाकर यह बात साबित कर रहा है कि भगवान राम के प्रति संगठन की जो आस्था है, वह रणनीति का एक हिस्सा है। वर्ना कोई अपने धर्म के प्रमुख चिन्हों को कैसे भूल सकता है। एक और बात चर्चा का विषय है और वह यह कि पथिक संदेश के अंक में बाबरी विध्वंस केस में न्यायालय के फैसले पर भी एक आर्टिकल प्रकाशित किया गया है लेकिन इसके बाद भी प्रबंधकों को दीपावली विशेषांक पर भगवान राम याद नहीं आए।

करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं दरकिनार 
हो सकता है कि संगठन को यह लगता हो कि अब भगवान राम के नाम पर सत्ता हासिल करने में भाजपा सफल हो चुकी है इसलिए अब नया मसला सामने लाया जाए ताकि नए सिरे से आम जनता को धर्म के नाम पर मूर्ख बनाने के काम को सर्वसिद्ध किया जा सके लेकिन सवाल यह है कि उन करोड़ों हिंदुओं की आस्था का क्या जो भगवान राम को अपना इष्ट मानते हैं और उनके लिए जान तक देने को तैयार हैं। उन हिंदुओं की भावनाओं का क्या होगा जिन्हें दरकिनार कर संगठन दूसरे धर्मों को खुश करने में लगा है लेकिन अपनी जमीन और अपनी जड़ों को खोखला कर रहा है।


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