गोनियाना सब-तहसील में करोड़ों का घोटाला! पुरानी रसीदें लगाकर रजिस्ट्रियां करने के आरोप
punjabkesari.in Wednesday, Jun 03, 2026 - 07:35 PM (IST)
बठिंडा/गोनियाना (विजय वर्मा/गोरा लाल): गोनियाना सब-तहसील में कथित तौर पर भ्रष्टाचार की सभी सीमाएं पार करते हुए एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप हैं कि कुछ अर्जीनवीसों, तहसील कर्मचारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से पुरानी रसीदों का इस्तेमाल कर रजिस्ट्रियां की गईं, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
सूत्रों के अनुसार यह मामला उस समय उजागर हुआ जब कुछ रजिस्ट्रियों पर लगी रसीदों की जांच के दौरान उन पर 2 और 3 वर्ष पुरानी तारीखें दर्ज मिलीं। इसके बाद हुई प्रारंभिक पड़ताल में कथित तौर पर ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आए, जिनमें पुरानी रसीदों का उपयोग करके रजिस्ट्रियां की गई थीं। मामले में एक कांग्रेसी नेता के राजनीतिक परिवार से संबंधित एक तहसीलदार की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तहसीलदार के ड्राइवर, क्लर्क और कुछ अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी संभव नहीं थी।
क्षेत्र के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों और रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों का कहना है कि गोनियाना सब-तहसील में रजिस्ट्रियों की फाइलें महीनों तक लंबित रखी जाती हैं और कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के बाद ही काम आगे बढ़ता है। उनका आरोप है कि अर्जीनवीसों और कुछ कर्मचारियों का एक गठजोड़ सरकारी नियमों को दरकिनार कर अपनी जेबें भरने में लगा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, मामले की चर्चा सार्वजनिक होने के बाद एक अर्जीनवीस और कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्ति कार्यालयों से गायब बताए जा रहे हैं। इससे लोगों के संदेह और भी गहरे हो गए हैं।
निष्पक्ष जांच हुई तो खुल सकते हैं बड़े राज
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय समिति से निष्पक्ष जांच करवाई जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है और कई बड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए डिप्टी कमिश्नर बठिंडा और एडीसी बठिंडा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। गोनियाना मंडी और आसपास के क्षेत्रों में इस कथित घोटाले की जोरदार चर्चा है। किसानों, प्रॉपर्टी डीलरों और कॉलोनाइजरों में हैरानी है कि यदि आरोप सही हैं तो सरकार की नाक के नीचे इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी आखिर कैसे होती रही।
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