पंजाब में वीरवार को स्कूलों में छुट्टी, कहां और क्यों, जानें पूरी Details
punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 02:48 PM (IST)
बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): स्कूल बसों के ट्रांसपोर्टरों की लंबे समय से चली आ रही मांगों तथा कथित तौर पर बार-बार की जा रही चेकिंग और चालानों के विरोध में अब निजी स्कूल प्रबंधक भी खुलकर सामने आ गए हैं। इस मामले को लेकर बरनाला, बठिंडा और मानसा जिलों के सभी निजी स्कूल एवं कॉलेज 3 सितंबर को बंद रखने का फैसला किया गया है। इसके चलते इन तीनों जिलों में शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियां प्रभावित होने की संभावना है।
स्कूल एंड कॉलेज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन पंजाब ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का ऐलान किया है। एसोसिएशन का कहना है कि स्कूल बसें चलाने वाले ट्रांसपोर्टरों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनकी ओर से सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष कई बार अपनी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन इनका स्थायी समाधान नहीं होने के कारण रोष बढ़ता जा रहा है।
चालानों की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
एसोसिएशन ने विशेष रूप से स्कूल बसों की चेकिंग के दौरान की जाने वाली कार्रवाई और चालानों का मुद्दा उठाया है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि बसों के चालान काटकर उनसे बड़ी रकम वसूली जा रही है। उनका कहना है कि यदि स्कूल बसों से संबंधित किसी नियम का उल्लंघन या कमी है तो उन्हें उसमें सुधार करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
इस मामले में फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब ने भी स्कूल बस ऑपरेटरों के संघर्ष का समर्थन किया है। फेडरेशन की ओर से कहा गया है कि स्कूलों के सहयोग से ट्रांसपोर्टरों की जायज मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए संयुक्त प्रयास किया जाएगा।
माता-पिता और विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा असर
3 सितंबर को स्कूल बंद रहने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ अभिभावकों के दैनिक कार्यक्रम पर भी असर पड़ सकता है। स्कूल प्रबंधकों ने इस बंद को ट्रांसपोर्टरों की मांगों के समर्थन से जोड़ा है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना है। अब देखना होगा कि सरकार की ओर से स्कूल बस ट्रांसपोर्टरों की मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल बरनाला, बठिंडा और मानसा के निजी शिक्षण संस्थानों का 3 सितंबर को बंद रहना इस मामले को लेकर बढ़ते रोष का संकेत माना जा रहा है।
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