गैस संकट और गहराएगा! US-ईरान बातचीत फेल होने के बाद LPG उपभोक्ता के लिए जरूरी खबर
punjabkesari.in Monday, Apr 13, 2026 - 04:47 PM (IST)
जालंधर (धवन) : संयुक्त राज्य अमरीका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद एक बार फिर घरेलू और कमर्शियल गैस संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत सहित कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं और उद्योगों की चिंता बढ़ गई है।
पिछले एक महीने से अधिक समय से खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमरीका और इजराइल का ईरान के साथ टकराव जारी है। इस तनाव के चलते तेल और गैस की सप्लाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम होने के कारण बाजार में इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है और ऊंचे दामों पर सिलैंडर बेचे जा रहे हैं। सप्लाई बाधित होने के चलते कई औद्योगिक इकाइयों को अपने गैस आधारित यूनिटों को तेल आधारित यूनिटों में बदलना पड़ा है, जिससे उत्पादन लागत भी बढ़ी है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में संयुक्त राज्य अमरीका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है या युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे हालात में कमर्शियल गैस का संकट और अधिक गहरा सकता है, जिससे उद्योगों की उत्पादन क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
दूसरी ओर घरेलू उपभोक्ताओं को भी गैस की कमी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर एक सिलैंडर वाले उपभोक्ताओं की स्थिति ज्यादा गंभीर बनी हुई है। गैस खत्म होने के बाद तुरंत नया सिलैंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी उठानी पड़ रही है। सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार उपभोक्ताओं को एक निश्चित अवधि के बाद ही गैस बुकिंग करने की अनुमति है, जिसके चलते समय पर गैस उपलब्ध नहीं हो पाती। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन बुकिंग के बावजूद 8 से 10 दिनों तक गैस सिलैंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। ऐसे में कई परिवारों को वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो घरेलू गैस संकट और भी गंभीर हो सकता है।
वहीं प्रशासन गैस कम्पनियों पर नियंत्रण रखने में भी नाकाम साबित हो रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस कम्पनियां मनमाने तरीके से सप्लाई कर रही हैं और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। गैस की अनियमित आपूर्ति और बढ़ती कालाबाजारी ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसके अलावा परिवहन लागत में बढ़ोतरी भी गैस संकट को और गंभीर बना रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण गैस सिलैंडरों की ढुलाई महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। गैस एजैंसियों का कहना है कि उन्हें समय पर पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही, जिससे डिलीवरी में देरी हो रही है। वहीं, बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस स्थिति से निपटने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे। गैस की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई, सप्लाई चेन को मजबूत करना और उपभोक्ताओं को समय पर सिलैंडर उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह संकट आम जनता और उद्योग दोनों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
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