नशे के खिलाफ अभियान की लाखों की सामग्री बनी कबाड़, DC दफ्तर की बेसमेंट में धूल फांक रहे मफलर-बैनर
punjabkesari.in Tuesday, Aug 11, 2026 - 08:29 AM (IST)
लुधियाना, (राज) : पंजाब सरकार द्वारा सूबे को नशा मुक्त करने के दावे के साथ शुरू किया गया युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान भले ही जमीनी स्तर पर बीच में ही दम तोड़ता नजर आ रहा हो, लेकिन इस मुहिम के प्रचार के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये पानी में जरूर बहा दिए गए हैं। सरकार द्वारा इस स्लोगन के प्रचार-प्रसार के लिए प्रिंट करवाई गई लाखों रुपये की प्रचार सामग्री आज लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय की बेसमेंट में धूल चाट रही है और कबाड़ के ढेर में तब्दील हो रही है।
मुहिम की शुरुआत में हर गांव और विधानसभा क्षेत्र में आप विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नशे के खिलाफ बड़ी-बड़ी रैलियां निकाली गई थीं। इन रैलियों में भीड़ को थमाने के लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर हाथ में पकडऩे वाली तख्तियां, पोस्टर, मफलर, बैनर और अन्य प्रचार सामग्रियां विशेष रूप से तैयार व प्रिंट करवाई थीं। लेकिन रैलियों का शोर शराबा खत्म होते ही इस महंगी सामग्री की सुध लेने वाला कोई नहीं रहा। आज डीसी दफ्तर के बेसमेंट में युद्ध नशियां विरुद्ध लिखी तख्तियां इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं, महंगे मफलर बोरियों से बाहर निकलकर गंदगी में सड़े जा रहे हैं और पोस्टर रद्दी के ढेर की तरह गल रहे हैं। सबसे हैरानी और चिंताजनक बात यह है कि डीसी दफ्तर की इस बेसमेंट और आसपास के गलियारों से रोजाना जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी गुजरते हैं। इसके बावजूद किसी भी अधिकारी की नजर जनता के टैक्स के पैसों से बनी इस सामग्री की बर्बादी पर नहीं पड़ रही है। लाखों रुपये की सामग्री को सही तरीके से स्टोर करने या किसी उपयोग में लाने के बजाय उसे गंदगी और कचरे के हवाले छोड़ दिया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल : प्रवीण ढंग
समाजसेवी प्रवीण ढंग का कहना है कि जब सरकार कोई अभियान शुरू करती है तो प्रचार के नाम पर जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन बाद में उस सामग्री की न तो कोई संभाल होती है और न ही हिसाब-किताब। लोगों ने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और बेसमेंट में बर्बाद हो रही सामग्री का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के इस अंतर ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

