अब असला लाइसेंस जारी करने में नहीं चलेगी DC व DCP की मनमानी, फाइल रिजेक्ट की तो देना होगा जवाब
punjabkesari.in Tuesday, Apr 21, 2026 - 10:29 AM (IST)
अमृतसर (नीरज): असला लाइसेंस जारी करने के मामले में डी.सी. व डी.सी.पी. की तरफ से कभी बड़े नेताओं की दखलांदाजी तो कभी भ्रष्टाचार तो कभी अपनी मनमानी आमतौर पर देखी जा सकती है, लेकिन लाइसेंस जारी करने के मामले में यह मनमानी अब नहीं चलने वाली है। जानकारी के अनुसार माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक आवेदनकर्त्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए जहां यह आदेश सुनाया है कि असला लाइसेंस का आवेदन देने वाले व्यक्ति को अब यह बताना जरुरी है कि उसके असला लाइसेंस की फाइल को क्यों रिजेक्ट किया गया है तो वहीं तीन महीने के भीतर याचिकाकर्त्ता का लाइसेंस बनाने के भी आदेश जारी कर दिए हैं।
अमृतसर जिले की बात करें तो पता चलता है कि डिप्टी कमिशनर अमृतसर व डी.सी.पी. लॉ एंड ऑर्डर की तरफ से अभी तक इस प्रकार की सैकड़ों की संख्या में फाइलों को रिजेक्ट किया जा चुका है, जबकि ऐसे मामलों में एस.एच.ओ. से लेकर एस.पी. रैंक तक के अधिकारियों ने आवेदनकर्त्ता को लाइसेंस जारी करने संबंधी सिफारिश की होती है, लेकिन जब फाइल सभी अधिकारियों की टेबल से घूमकर डी.सी. व डी.सी.पी. की टेबल पर आती है तो रिजेक्ट कर दी जाती है आवेदनकर्त्ता को यह भी नहीं बताया जाता है कि फाइल रिजेक्ट क्यों की गई है।
लाइसेंस जारी करने से पहले ली जाती है 40 से 45 हजार की फीस
पूर्व डिप्टी कमिशनर हरप्रीत सिंह सूदन की तरफ से अपने कार्यकाल के दौरान असला लाइसेंस के मामले में रैड क्रॉस दफ्तर से मिलने वाली 11 हजार रुपए की फाइल का नियम बंद कर दिया था, लेकिन इससे पहले डीसी दफ्तर में असला लाइसेंस का आवेदन देने से पहले 11 हजार की फाइल और लगभग 29 हजार रुपए की सरकारी फीस भरनी पड़ती थी, जबकि मौजूदा समय में असला लाइसेंस लेने के लिए फिर से रैड क्रास की 15 हजार रुपए की पर्ची कटवानी पड़ती है, जो अवैध है, लेकिन प्रशासन रैड क्रास की इनकम बढ़ाने के लिए ऐसा करता है, इतना ही नहीं 40 से 45 हजार रुपए की सरकारी फीस जमा करवानी पड़ती है।
इसी प्रकार से डी.सी.पी. लॉ एंड आर्डर के दफ्तर में भी डी.सी.पी. की तरफ से फाइल जारी किए जाने के बाद अलग-अलग सेवा केन्द्रों पर लगभग 25 हजार रुपए की फीस ली जाती है, लेकिन इतनी फीस लेने के बाद भी डी.सी. या डी.सी.पी. की तरफ से लाइसेंस की फाइल को रिजेक्ट कर दिया जाता है और ली गई सरकारी फीस का रिफंड भी नहीं दिया जाता है। हालांकि डी.सी.पी. दफ्तर में डी.सी. दफ्तर की तुलना सिर्फ 1 हजार रुपए की फाइल फीस ली जाती है।
असला लाइसेंस के मामले में एक जिले में 2 कानून
प्रशासनिक व कानून व्यवस्था के ढीलेपन का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि असला लाइसेंस जारी करने के मामले में एक जिले में दो-दो कानून चल रहे हैं। डी.सी. दफ्तर में आधार कार्ड, पैन कार्ड व फोटो के साथ घर का नक्शा लगाना होता है, जबकि डी.सी.पी. लॉ एंड ऑर्डर के दफ्तर में आधार कार्ड, पैन कार्ड व फोटो के अलावा तीन वर्षों की इनकम टैक्स रिटर्न भरनी पड़ती है, जिस व्यक्ति के पास रिटर्न नहीं है उसके लाइसेंस की फाइल स्कैन नहीं होती है। डी.सी. दफ्तर के देहाती इलाके में संबंधित थाने के एस.एच.ओ. से लेकर डी.एस.पी. व एस.एस.पी. देहाती के बाद डी.सी. की मंजूरी दिलवानी पड़ती है, जिसमें पुलिस अधिकारियों से लेकर सिवल अधिकारियों से मंजूरी करवानी पड़ती है, जबकि सिटी एरिया में सिर्फ पुलिस की तरफ से ही सारी कार्रवाई की जाती है।
गैंगस्टरों को पाकिस्तान से मिल जाते हैं अत्याधुनिक पिस्टल, आम आदमी को खर्च करने पड़ते हैं 2 से 3 लाख
आमतौर पर पुलिस की तरफ से ही दावा किया जाता है कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व अन्य राज्यों से गैंस्टरों को लगभग एक लाख रुपये में रिवाल्वर व पिस्टल आदि मिल जाता है, जबकि पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन के जरिए तो अत्याधुनिक पिस्टल, जिसमें 9 एम.एम., जिगाना, गलाक व बरैटा जैसे खतरनाक पिस्टल उपलब्ध करवा दिए जाते हैं। कुछ मामलों में तो गैंगस्टरों के पास ऐ.के.-99 व ऐ.के.-47 जैसे खतरनाक असॉल्ट राइफल जैसे हथियार भी हैं, लेकिन आम आदमी को जो अपनी आत्मरक्षा के लिए हथियार खरीदना चाहता है। उसको कम से कम 2 से 3 लाख रुपए एक रिवाल्वर व पिस्टल के लिए खर्च करने पड़ते हैं। आई.ओ.एफ. का रिवॉल्वर व पिस्टल की कीमत लगभग सवा लाख से डेढ़ लाख रुपए हैं, जो 32 बोर का होता है, जबकि 45 बोर की पिस्टल की कीमत ढाई लाख से लेकर 10 लाख तक रहती है। इतनी रकम खर्च करने के बाद भी डी.सी.पी. से लेकर एस.एच.ओ., डी.एस.पी. व एस.पी. रैंक के अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला साफ देखने को मिलता है।
दबंग नेताओं की सिफारिश पर रेवड़ियों की तरह बांटे जाते हैं लाइसेंस
पिछली सरकारों के दौरान दबंग नेताओं की सिफारिशों पर रेवड़ियों की तरह असला लाइसेंस बांटे गए थे, लेकिन जब कोई जरुरतमंद नागरिक जिसने अपनी आत्मरक्षा के लिए हथियार लेना होता है, उससे 40 से 45 हजार रुपया फीस वसूलने के बाद भी डी.सी. या डी.सी.पी. लॉ एंड ऑर्डर के दफ्तर से लाइसेंस की फाइल रिजेक्ट कर दी जाती है और फीस भी रिफंड नहीं की जाती है, लेकिन अब न्यायालय के आदेशानुसार उक्त अधिकारियों को फाइल रिजेक्ट करने का कारण बताना होगा।
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