कर्मचारियों का हक रोककर विज्ञापनबाजी में जुटी मान सरकार, हाई कोर्ट के आदेश की भी नहीं परवाह : चुघ
punjabkesari.in Thursday, Sep 24, 2026 - 07:01 PM (IST)
पंजाब डैस्क : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा लंबित डीए/डीआर के भुगतान से जुड़े आदेशों के अनुपालन में विफल रहने पर पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिए जाने पर भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हक का पैसा रोकना तथा अदालत के स्पष्ट आदेशों का पालन न करना भगवंत मान सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।
तरुण चुग ने कहा कि 3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित डीए/डीआर की सभी किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुसार जारी करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने भुगतान में देरी होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भी निर्देश दिया था और मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को कहा था। इसके बावजूद अनुपालन न होने पर अब मुख्य सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
चुग ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित डीए/डीआर की राशि करीब *₹14,191 करोड़* बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने वर्षों तक पंजाब सरकार की व्यवस्था को संभाला, आज उन्हीं को अपने जायज हक के लिए आंदोलन और अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अक्टूबर से डीए में बढ़ोतरी की घोषणा पुराने लंबित बकायों के भुगतान का विकल्प नहीं है; वर्तमान वृद्धि और पुराने डीए/डीआर एरियर्स दो अलग मुद्दे हैं।
तरुण चुग ने कहा कि हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाए का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक राज्य को बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे अनुत्पादक खर्चों से बचना चाहिए। इसके बावजूद यदि सरकार अपने प्रचार पर पैसा खर्च करती है और कर्मचारियों का बकाया रोकती है, तो यह उसकी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज कर्मचारी अपने ही वेतन और पेंशन से जुड़े जायज अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को कानूनी दांव-पेच और बहानेबाजी छोड़कर हाई कोर्ट के आदेश का सम्मान करना चाहिए और लंबित डीए/डीआर की सभी देय किस्तें तथा बकाया राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित जारी करनी चाहिए।
तरुण चुग ने मांग की कि पंजाब सरकार अदालत के आदेशों का तत्काल पालन करे, कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित 18 प्रतिशत डीए/डीआर का भुगतान करे, बकाया राशि पर निर्धारित ब्याज दे और जनता के पैसे से होने वाली अनावश्यक विज्ञापनबाजी पर रोक लगाए। उन्होंने कहा कि पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर अकेले नहीं हैं और भाजपा उनके न्यायसंगत अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी है।

