मोगा से ही क्यों भाजपा ने किया शंखनाद ?
punjabkesari.in Sunday, Mar 15, 2026 - 12:18 PM (IST)
जालंधर (अनिल पाहवा): शनिवार को भारतीय जनता पार्टी ने मोगा के किल्ली चाहलां में बदलाव रैली का आयोजन किया, जिसे पंजाब में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी रैली बताया जा रहा है। रैली में भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य तौर पर उपस्थित हुए। रैली के अंत में मोगा के भाजपा अध्यक्ष हरजोत सिंह ने जहां सभी का आभार जताया, वहीं इस बात को भी साफ किया आखिर भाजपा ने मोगा में ही रैली क्यों रखी। उन्होंने तर्क दिया कि मोगा पंजाब का सैंटर सिटी है, जिस कारण यहां रैली रखी गई। उन्होंने तो मोगा को पंजाब की राजधानी बनाने की भी बात कर दी। यह बात वैसे तो सामान्य है, लेकिन मोगा में रैली करके 2027 के लिए भाजपा ने जो शंखनाद किया है, वह सामान्य बात नहीं है।
दरअसल मोगा में भाजपा ऐसी पहली पार्टी नहीं है, जिसने रैली की है। इससे पहले भी कई राजनीतिक दलों ने मोगा में रैली करके सफलता हासिल की है। इसे बाईचांस कहा जाए या कोई जादू, लेकिन यह बात सही है कि मोगा में शंखनाद करने वाले अधिकतर राजनीतिक दल आश्चर्यचकित तरीके से जीत हासिल कर चुके हैं। यह सिलसिला कोई नया नहीं है, बल्कि वर्ष 1974 से अब तक कई ऐसे मामले हुए हैं, जब मोगा में हुआ शंखनाद राजनीतिक दलों को सत्ता के गलियारों तक ले आया है। जानकारी के अनुसार 1974 में मोगा में एक छात्र रैली हुई थी, जिसे संग्राम रैली का नाम दिया गया था। यहां पर यह पहली रैली एक आंदोलन बन गई थी और लाखों छात्रों की भीड़ ने जीत का परचम लहराया था।
यह तो एक छात्र संगठन की बात है, मोगा में राजनीतिक दलों ने भी खासी सफलताएं हासिल की हैं। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल को किसी समय कट्टर संगठन कहा जाता था। कट्टर छवि के कारण उसे नुक्सान भी हो रहा था, लेकिन 1996 में अपने चुनावी अभियान का आगाज शिरोमणि अकाली दल ने मोगा से किया था और इस आगाज के दौरान शिरोमणि अकाली दल ने जहां अपने कट्टरवादी संगठन होने की छवि को तोड़ने में सफलता हासिल की, वहीं 1997 में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 117 में से 75 सीटें जीतीं।
मोगा की धरती शिरोमणि अकाली दल के लिए ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए भी किसी समय वरदान साबित हो चुकी है। पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी वैसे तो आम बात है, लेकिन 2017 का एक दौर था, जब कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर थी। केंद्रीय नेतृत्व ने इस गुटबाजी को खत्म करने के लिए एक बड़े स्तर की रैली आयोजित करने को कहा था। 'कैप्टन लाओ' नाम की इस रैली का आयोजन 2017 में मोगा के बाघापुराना में किया गया। इस अभियान का शंखनाद हुआ तो 2017 के विधानसभा चुनावों में कैप्टन लाओ का नारा सफल हुआ और कांग्रेस ने राज्य में 77 सीटें जीतकर सफलता हासिल की। कांग्रेस ने इस तरह का अभियान लोकसभा चुनावों में 2019 में भी चलाया, जब देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की लहर थी। इस बार भी कांग्रेस 13 में से 8 सीटें जीतने में सफल रही।
पंजाब में मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार ने हाल ही में महिलाओं को 1000 रुपया तथा दलित महिलाओं को 1500 रुपए प्रति माह देने की योजना का ऐलान किया है। यह योजना पहली बार मोगा की धरती पर ही घोषित की गई थी। 2022 के चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक रैली के दौरान मोगा से इस गारंटी का ऐलान किया था और जिसके बाद विधानसभा चुनावों में पार्टी 117 में से 92 सीटें ले गई।
अब भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है, यह तो कोई नहीं जानता। लेकिन भाजपा की मोगा रैली को भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। भाजपा ने 2027 के चुनावों के लिए मोगा से आज शंखनाद किया, और इसकी बकायदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की। अगर मोगा की धरती पर वाकई में कोई ऐसा जादू है, जो यहां पर घोषणा करने वाले संगठन को सफलता प्रदान करती है, तो संभवतः राज्य में अमित शाह की घोषणा के अनुसार अगली सरकार भाजपा की हो सकती है। लेकिन हम इस बात की पुष्टि नहीं करते क्योंकि भविष्य में क्या होना है, वो इन्सान के वश में नहीं है।
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