पंजाब की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल! ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी से मिला चिट्टा

punjabkesari.in Monday, Oct 12, 2026 - 12:10 PM (IST)

नाभा (राहुल खुराना): अगर बाड़ ही खेत को खाने लगे तो खेत का क्या होगा, यह कहावत बिल्कुल सच है। नाभा की नई जिला जेल में पुलिस और जेल प्रशासन की चेकिंग के दौरान जेल के अंदर ड्यूटी पर तैनात PESCO के सुपरवाइजर कर्मचारी बलवीर सिंह से 28 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। आरोपी बलवीर सिंह जेल अस्पताल में ड्यूटी पर था। यह चिट्टा जेल में नजरबंद लखबीर सिंह को देना था, पुलिस ने PESCO कर्मचारी बलवीर सिंह और जेल में बंद कैदी लखबीर सिंह के खिलाफ एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों को पुलिस रिमांड पर ले लिया है और उनसे गहराई से जांच की जा रही है। यह जानकारी डी.एस.पी. गुरिंदर सिंह बल ने दी।

नाभा की नई जिला जेल को सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है। पंजाब की जेलों में प्राइवेट कंपनी PEXO के कर्मचारी जेलों के अंदर ड्यूटी पर हैं, इनमें से ज्यादातर आर्मी से रिटायर होने के बाद यह ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन नाभा जेल में PESCO कंपनी का रिटायर्ड आर्मी कर्मचारी बलबीर सिंह जेल में ड्यूटी के दौरान जेल में ड्रग्स सप्लाई करने के धंधा कर रहा था, तभी नाभा पुलिस और जेल प्रशासन की तलाशी के दौरान उसके पास से 28 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। हालांकि आरोपी बलबीर सिंह को जेल में ड्यूटी के दौरान पकड़ा गया, लेकिन आरोपी यह चिट्टा लखबीर सिंह को देने वाला था, जो पहले से ही एन.डी.पी.सी.एस. एक्ट के तहत जेल में बंद है।

इस मौके पर नाभा के डी.एस.पी. गुरिंदर सिंह बल ने बताया कि नाभा की नई जिला जेल के अंदर जेल प्रशासन और पुलिस की जॉइंट चेकिंग के दौरान जेल में ड्यूटी पर तैनात पेस्को कर्मचारी बलबीर सिंह से 28 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ, जो यह चिट्टा लखबीर सिंह को देने वाला था, जो पहले से ही एन.डी.पी.सी.एस. एक्ट के तहत जेल में बंद है। उन्होंने दोनों का पुलिस रिमांड ले लिया है और पता लगाया जा रहा है कि इस गोरखधंधे के पीछे और कौन-कौन है। उन्होंने उनके खिलाफ एन.डी.पी.सी.एस. एक्ट के तहत केस भी दर्ज कर रिमांड ले लिया है और रिमांड के दौरान और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
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लेकिन हैरानी की बात यह है कि जेलें, जिन्हें अपराधियों को सुधारने और उन्हें कानून के दायरे में रखने के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, वहां के कामकाज पर बड़े सवाल उठते हैं। अगर जिम्मेदार कर्मचारी ही यह धंधा करने लगेंगे, तो ड्रग्स कैसे रुकेंगे। अगर इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो सुधार का घर बनने के बजाय जेलें अपराध और ड्रग्स का अड्डा बन कर रह जाएंगी। इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

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News Editor

Urmila

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