लुधियाना का सबसे बड़ा सफाई प्रोजेक्ट सुपर-फ्लॉप, 1408 करोड़ की योजना ठप्प

punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 05:15 PM (IST)

लुधियाना (राज): महानगर को डंपयार्ड (कचरे के पहाड़ों) से मुक्ति दिलाने और स्मार्ट सिटी की तर्ज पर चमकाने के नगर निगम के दावों की सरेआम हवा निकल गई है। नगर निगम के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा 1408 करोड़ रुपये का सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट पूरी तरह से सुपर-फ्लॉप होकर रद्द कर दिया गया है। निगम की लचर कारगुजारी के कारण अब यह प्रोजेक्ट उसके हाथों से निकलकर सीधे राज्य सरकार के पास चला गया है, जिसे निगम के लिए एक बहुत बड़ा प्रशासनिक झटका माना जा रहा है। 

सरकार अब इस महा-प्रोजेक्ट को 'रेट कांट्रेक्टर बेस' पर करवाने की बिसात बिछा रही है, जिसके बाद विपक्ष और निगम गलियारों में 'आप' सरकार पर अपनी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोप अभी से लगने शुरू हो गए हैं। इस नाकामी के बाद आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण में लुधियाना की रैंकिंग का पाताल में गिरना बिल्कुल तय माना जा रहा है।

क्या है 'रेट कांट्रेक्टर बेस' का असली खेल? बैकडोर एंट्री का खुला रास्ता!

विभागीय और राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, जब किसी बड़े प्रोजेक्ट के लिए कोई कंपनी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेती, तो सरकार को यह विशेष अधिकार मिल जाता है कि वह पहले से ही उस क्षेत्र में काम कर रहे किसी ठेकेदार या कंपनी को उसी पुराने तय रेट पर नया काम अलॉट कर दे। इसे तकनीकी भाषा में 'रेट कांट्रेक्टर बेस' कहा जाता है। आरोप लग रहे हैं कि जालंधर की एक कंपनी, जो सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं की बेहद चहेती बताई जाती है, उसे पहले ही बिना किसी ओपन बिडिंग के इसी पैटर्न पर लुधियाना के 26 वार्डों में सीवर सफाई का ठेका बैकडोर एंट्री के जरिए दिया जा चुका है। अंदरखाने चर्चा है कि अब 1408 करोड़ रुपये के इस सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट को भी उसी चहेती कंपनी की झोली में डालने के लिए बाकायदा एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा चुकी है, जो जल्द ही नगर निगम के वित्तीय अधिकार छीनने की अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी।

264 करोड़ रुपये बढ़ाए, दो बार टेंडर लगाए, फिर भी फुस्स रहा निगम!

सूत्रों ने खुलासा किया कि नगर निगम ने सबसे पहले शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने, सेकेंडरी डंप से मुख्य डंप तक कचरा पहुंचाने और उसकी साइंटिफिक प्रोसेसिंग के लिए 1144 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर लगाया था। लेकिन निगम के लचर ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए कोई भी बड़ी कंपनी आगे नहीं आई। इसके बाद निगम अधिकारियों ने प्रोजेक्ट की लागत में सीधे 264 करोड़ रुपये का भारी इजाफा करते हुए इसे 1408 करोड़ रुपये का कर दिया। इसके बावजूद जब दो बार टेंडर प्रक्रिया दोहराई गई, तो भी कोई बिडर सामने नहीं आया, जिससे निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

लुधियाना में कचरे का पहाड़, आगामी स्वच्छ सर्वेक्षण में पिटेगा भट्ठाऔद्योगिक नगरी लुधियाना में रोजाना 1100 मीट्रिक टन भारी मात्रा में कचरा निकलता है। कड़वी सच्चाई यह है कि शहर में आज भी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का कोई फुल-प्रूफ सिस्टम नहीं है। सबसे डरावनी स्थिति यह है कि हर रोज पैदा होने वाले इस पहाड़ जैसे कचरे की प्रोसेसिंग फिलहाल शून्य है। जब स्वच्छ सर्वेक्षण की केंद्रीय टीमें शहर का मुआयना करने पहुंचेंगी, तो प्रोसेसिंग और कलेक्शन के मोर्चे पर लुधियाना पूरी तरह फेल साबित होगा, जिसका सीधा नुकसान शहर की राष्ट्रीय रैंकिंग को भुगतना पड़ेगा।

महानगर के 4 बड़े सफाई प्रोजेक्ट्स की ताजा ग्राउंड रिपोर्ट:

1. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (लागत: ₹1408 करोड़) — पूरी तरह फ्लॉप, प्रोजेक्ट रद्द!

महानगर के इतिहास का यह सबसे भारी-भरकम और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नगर निगम की लचर कार्यप्रणाली के कारण पूरी तरह से रद्द हो चुका है। अब नगर निगम इसका दोबारा टेंडर जारी नहीं करेगा। इस महा-प्रोजेक्ट की फाइल अब राज्य सरकार के पाले में चली गई है, जहां इसे बैकडोर से अलॉट करने की खिचड़ी पक रही है।

2. अंदरूनी सड़कों की मशीनी सफाई (लागत: ₹70 करोड़) — टेंडर नहीं चढ़ा सिरे, काम लटका!

शहर की अंदरूनी और रिहायशी इलाकों की सड़कों को आधुनिक मशीनों से चमकाने का यह ₹70 करोड़ का प्रोजेक्ट भी सिरे नहीं चढ़ सका। बिडर्स की बेरुखी और निगम की ढीली नीति के कारण यह काम फिलहाल पूरी तरह लटक गया है। अधिकारी अब इसके लिए दोबारा नए सिरे से टेंडर लगाने की कागजी तैयारी में जुटे हैं।

3. मुख्य सड़कों की सफाई (लागत: ₹81 करोड़) — राहत की खबर, टेंडर प्रक्रिया पूरी!

महानगर के लिए बस यही एक राहत भरी खबर है। शहर के मुख्य मार्गों (Main Roads) की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ₹81 करोड़ की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। अधिकारियों का दावा है कि अलॉटमेंट के बाद इन सड़कों पर सफाई का काम धरातल पर जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।

4. लिटर पिकिंग मशीनरी (लागत: ₹4.12 करोड़) — हरी झंडी मिली, जल्द होगी खरीद!

शहर के कोने-कोने से कचरा उठाने के लिए 6 आधुनिक लिटर पिकिंग मशीनें खरीदने के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। इसका टेंडर फाइनल हो चुका है और अब सिर्फ मशीनरी की वास्तविक खरीद और उन्हें सड़कों पर उतारने की औपचारिकता बाकी है। निगम के इन बड़े प्रोजेक्ट्स के लटकने से साफ है कि आने वाले दिनों में शहरवासियों को गंदगी और डंप की बदबू से निजात मिलना नामुमकिन लग रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी इस बैकडोर एंट्री पर क्या फैसला लेती है और क्या शहर को वाकई सफाई मिल पाएगी या करोड़ों का फंड इसी तरह फाइलों में दफन रहेगा।

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News Editor

Kamini

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