जगराओं पुल की मरम्मत पर सियासी घमासान, ₹1.40 करोड़ का टेंडर हुआ रद्द, खतरा बरकरार
punjabkesari.in Sunday, Oct 04, 2026 - 09:50 AM (IST)
लुधियाना (राज): महानगर की यातायात व्यवस्था की रीढ़ और सबसे व्यस्त लाइफलाइन माने जाने वाले ऐतिहासिक जगराओं पुल की मरम्मत व सुरक्षा का काम आम आदमी पार्टी के शीर्ष स्थानीय नेताओं की आपसी सियासी खींचतान और ईगो फाइट की भेंट चढ़ गया है। गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब की ओर आने-जाने वाले एप्रोच मार्ग, अंडर व्हीकल पास की बदहाली और पुल की जरूरी मरम्मत के लिए नगर निगम द्वारा जारी किया गया 1.40 करोड़ रुपये का मेंटेनेंस टेंडर ऐन वक्त पर रद्द कर दिया गया है। पहले से तकनीकी तौर पर अनसेफ घोषित इस पुल पर मेंटेनेंस का काम अटकने से रोजाना यहां से गुजरने वाले लाखों वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ गई है।
वर्क ऑर्डर से ठीक पहले मेयर ने जताया एतराज, टेंडर खारिज
विभागीय सूत्रों के अनुसार, जगराओं पुल के इस 1.40 करोड़ रुपये के मेंटेनेंस प्रोजेक्ट की तमाम कानूनी व वित्तीय टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। संबंधित ठेकेदार को केवल अंतिम 'वर्क ऑर्डर' जारी होना बाकी था, जिससे मौके पर काम शुरू कराया जा सके। इसी बीच मेयर इंद्रजीत कौर ने टेंडर पर तकनीकी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे रद्द करने के निर्देश दे दिए। मेयर का तर्क है कि टेंडर में अनुमानित लागत से केवल 5 प्रतिशत लेस आई है, जबकि निगम के वित्तीय हित में यह कटौती इससे अधिक होनी चाहिए थी। मेयर के इस सख्त रुख के बाद प्रोजेक्ट की फाइल ठंडे बस्ते में चली गई है।
सीनियर डिप्टी मेयर पराशर का पलटवार: 'जानबूझकर लगाया अड़ंगा'
टेंडर रद्द किए जाने के फैसले पर सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर ने मेयर के फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए इसे प्रोजेक्ट में जानबूझकर अड़ंगा लगाना करार दिया है। राकेश पराशर ने कहा कि जगराओं पुल शहर की लाइफलाइन है और सुरक्षा के लिहाज से इसका काम अविलंब शुरू होना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी नगर निगम की बैठकों में 5 प्रतिशत से कम लेस वाले कई बड़े विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने, तकनीकी बिड खोलने और वर्क ऑर्डर देने में महीनों का कीमती समय बर्बाद होगा, जिससे पुल की हालत और बदतर हो जाएगी।
खिसक रही है मिट्टी, अंडरपास के गड्ढों से हादसे का खतरा
बरसात के दिनों में जगराओं पुल के ढलान वाले हिस्सों और रिटेनिंग वॉल के पास से कई जगह मिट्टी खिसक चुकी है। पुल के नीचे बने अंडर व्हीकल पास की सड़क पूरी तरह टूट चुकी है और वहां गहरे-गहरे जानलेवा गड्ढे बने हुए हैं। अनसेफ घोषित होने के बावजूद पुल पर दिन-रात भारी ट्रैफिक का दबाव रहता है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि नेताओं की आपसी खींचतान और कागजी दांवपेंच के बीच यदि पुल का कोई हिस्सा धंस जाता है या कोई बड़ा जानी हादसा हो जाता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
एसई रणजीत सिंह बोले—'नए सिरे से जारी होगा टेंडर'
मामले की आधिकारिक पुष्टि करते हुए नगर निगम के अधीक्षण अभियंता (SE) रणजीत सिंह ने बताया कि उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद पुराना मेंटेनेंस टेंडर निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि नियमों के तहत अब जगराओं पुल की मरम्मत के लिए नए सिरे से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई प्रक्रिया पूरी होकर पुल पर वास्तविक काम कब तक शुरू हो पाएगा, जिससे लाखों वाहन चालकों में असमंजस और रोष बना हुआ है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

