Iran-Israel War: शहर की डाइंग इंडस्ट्री पर गहराया संकट, कच्चे माल की किल्लत से बढ़ी चिंता
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 11:03 AM (IST)
लुधियाना (राम): वैश्विक स्तर पर जारी ईरान-इसराईल तनाव अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर भारत की औद्योगिक गतिविधियों पर भी दिखने लगा है। देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री इन हालात से बुरी तरह प्रभावित हो रही है। महादेव वॉशिंग के कमल चौहान का कहना है कि कच्चे माल की कमी, लागत में लगातार बढ़ौतरी और सप्लाई चेन टूटने से फैक्ट्री मालिकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
डाइंग इंडस्ट्री का सबसे अहम हिस्सा है कैमिकल, तेजाब और रंग (डाई) लेकिन मौजूदा हालात में इन सभी चीजों की उपलब्धता तेजी से घटती जा रही है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में कैमिकल और रंग मिलना बेहद मुश्किल हो गया है। जो माल उपलब्ध भी है, उसकी कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में फैक्टरी मालिकों के लिए उत्पादन जारी रखना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।
हाल ही में एक्रैलिक डाइंग करने वाले फैक्टरी मालिकों ने बैठक कर अपने रेट में 10 रुपए प्रति किलो बढ़ौतरी की थी। उम्मीद थी कि इससे बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम होगा लेकिन हकीकत इसके उलट निकली। कच्चे माल की कमी ने इंडस्ट्री को और परेशान कर दिया। चौहान का कहना है कि डाइंग इंडस्ट्री में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाला राइस हस्क भी अब महंगा हो चुका है। पहले से ही बढ़ती लागत के बीच यह एक और झटका साबित हुआ है।
‘आप’ सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का आरोप है कि आम आदमी पार्टी की सरकार इस गंभीर स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दे रही। खास बात यह है कि पंजाब के इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा खुद लुधियाना से ही हैं, बावजूद इसके स्थानीय उद्योगों की समस्याओं पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा। फैक्टरी मालिकों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते दखल नहीं देती तो यह संकट और गहरा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संघर्षों का सीधा असर तेल की कीमतों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ता है। जब कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होती है तो उसका असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर सबसे पहले दिखता है। लुधियाना की डाइंग इंडस्ट्री भी इसी चक्र में फंसती नजर आ रही है।
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