संजीव अरोड़ा मामले में ED ने PSPCL के चेयरमैन को किया तलब
punjabkesari.in Saturday, May 16, 2026 - 08:28 PM (IST)
पंजाब डैस्क : AAP सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी रिफंड मामले में ED ने PSPCL के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड सहित पेश होने के लिए कहा है।
मामला उस समय का बताया जा रहा है जब संजीव अरोड़ा पंजाब सरकार में बिजली मंत्री थे। आरोप है कि उनसे जुड़ी कंपनी रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को करीब 1.96 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी नियमों के विपरीत वापस कर दी गई। PSPCL के CMD बसंत गर्ग ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि विभाग ED को सभी रिकॉर्ड और संबंधित फाइलें सौंपेगा।
दरअसल, लुधियाना के हैम्पटन कोर्ट बिजनेस पार्क से जुड़े इस मामले में कंपनी ने पहले 66 KV वोल्टेज पर बिजली लोड बढ़ाने के लिए 1.97 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करवाई थी। बाद में कंपनी ने सप्लाई वोल्टेज बदलने के लिए आवेदन किया, जिसके बाद नई बैंक गारंटी जमा करवाने की शर्त रखी गई थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल इस बात पर उठ रहा है कि नई बैंक गारंटी जमा हुए बिना ही पुरानी 1.97 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी कंपनी को वापस कैसे कर दी गई। रिकॉर्ड के मुताबिक कंपनी ने 2 फरवरी को गारंटी वापस मांगने के लिए पत्र लिखा और PSPCL ने अगले ही दिन रकम रिलीज कर दी।
वर्ष 2023 में, जब संजीव अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे, तब रितेश प्रॉपर्टीज ने PSPCL से अपनी बिजली मांग 1950 KVA से बढ़ाकर 7293 KVA करने के लिए 66 KV वोल्टेज पर संशोधित NOC मांगी थी। PSPCL के नियमों के अनुसार कंपनी ने सप्लाई सिस्टम की लागत का 35 प्रतिशत यानी 1.97 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करवाई थी।
इसके बाद वर्ष 2025 में, जब संजीव अरोड़ा उपचुनाव जीतकर विधायक बन चुके थे, कंपनी ने सप्लाई वोल्टेज को 66 KV से घटाकर 11 KV करने के लिए आवेदन किया। इसके लिए कंपनी को 1.87 करोड़ रुपये की नई बैंक गारंटी जमा कराने को कहा गया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि पुरानी बैंक गारंटी तभी लौटाई जाएगी जब नई गारंटी जमा हो जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, जब PSPCL के इंजीनियरों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई, तब जाकर 6 अप्रैल में नई बैंक गारंटी जमा करवाई गई। अब ED इस पूरे मामले में यह जांच कर रही है कि क्या सत्ता और विभागीय प्रभाव का इस्तेमाल कर नियमों में ढील दी गई थी।

