पठानकोट में 51वें दिन खत्म हुआ बुजुर्गों का धरना, 200 फीट ऊंचे टावर से नीचे उतरे
punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 04:04 PM (IST)
पठानकोट (हरजिंदर सिंह गोराया): पठानकोट अपनी मांगों को लेकर डीसी आवास के सामने लगभग 200 फीट ऊंचे बिजली टावर पर 50 दिनों तक डटे रहने के बाद कुलविंदर सिंह (82) और शरम सिंह (85) मंगलवार को धरने के 51वें दिन सुरक्षित नीचे उतर आए। जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत के बाद दोनों बुजुर्गों ने टावर से नीचे उतरने पर सहमति जताई। प्रशासन की ओर से उन्हें सुरक्षित नीचे उतारने के लिए विशेष हाइड्रोलिक क्रेन का प्रबंध किया गया था। दोनों बुजुर्गों के नीचे उतरने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।

सोमवार देर शाम डीसी पल्लवी, एडीसी अर्शदीप सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद बुजुर्गों ने नीचे उतरने के लिए हामी भर दी थी, लेकिन उन्होंने रात के समय उतरने से इनकार कर दिया। बुजुर्गों ने बताया कि पिछले कई दिनों से महज दो फीट के प्लेटफॉर्म पर रहने के कारण उनके घुटनों में काफी परेशानी हो रही थी। इसके अलावा रात के समय कम रोशनी में क्रेन के सहारे नीचे उतरना जोखिम भरा हो सकता था। इसी कारण उन्होंने मंगलवार सुबह उजाला होने पर नीचे उतरने का फैसला किया।

पहले सिविल अस्पताल में होगा मेडिकल, फिर परिवार के साथ भेजे जाएंगे घर
टावर से सुरक्षित नीचे उतरने के बाद दोनों बुजुर्गों को पहले सिविल अस्पताल ले जाया जाएगा, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी स्वास्थ्य जांच और मेडिकल करेगी। मेडिकल जांच के बाद दोनों बुजुर्गों को उनके परिवार के सदस्यों के साथ घर भेजा जाएगा। लगातार 50 दिनों तक लगभग 200 फीट की ऊंचाई पर रहने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगले सप्ताह चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री के साथ बैठक करवाने का आश्वासन
बुजुर्गों को टावर से नीचे उतारने के लिए मौके पर पहुंचे एडीसी अर्शदीप सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के साथ काफी समय से बातचीत चल रही थी, जो सोमवार को सहमति पर पहुंची। प्रशासन की ओर से बैराज औस्ती संघर्ष समिति को आश्वासन दिया गया है कि उनकी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। बैराज औस्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष दयाल सिंह ने बताया कि डीसी, एडीसी और बांध प्रशासन के अधिकारियों ने बुजुर्गों के साथ बातचीत की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगले सप्ताह प्रभावित परिवारों की मुख्यमंत्री के साथ बैठक करवाने की व्यवस्था की जाएगी। अब प्रभावित परिवारों को इस बैठक से अपनी लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद है।
33-34 साल पुराना है मामला, कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर होगा समाधान
एडीसी अर्शदीप सिंह ने बातचीत में हुई देरी के संबंध में बताया कि शाहपुरकंडी बैराज एवं डैम परियोजना से जुड़ा यह मामला लगभग 33-34 साल पुराना है। इतने पुराने और जटिल मामले का समाधान निकालने के लिए सभी पहलुओं पर विचार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशासन सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ यह प्रयास कर रहा है कि नियमों के दायरे में प्रभावित परिवारों को किस प्रकार राहत दी जा सकती है। हालांकि, किसी भी निर्णय में कानून और सरकार की नीतियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने का प्रयास किया जाएगा।
धरने के दौरान सुरक्षा, भोजन और मेडिकल सुविधाएं देने का दावा
एडीसी ने बताया कि टावर पर धरने के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस गार्ड तैनात किए गए थे। इसके अलावा बुजुर्गों के लिए रोशनी, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंध भी किया गया। प्रशासन के अनुसार, मेडिकल टीम मौके पर मौजूद रहकर बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जांच करती रही और जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध करवाती रही। दोनों बुजुर्गों को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए 120 फीट ऊंची हाइड्रोलिक क्रेन का प्रबंध किया गया था। सोमवार रात उतरने से इनकार करने के बाद मंगलवार सुबह दोनों को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो संघर्ष जारी रहेगा: दयाल सिंह
बैराज औस्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष दयाल सिंह ने कहा कि प्रभावित परिवार पिछले लगभग 34 वर्षों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मांगों का स्थायी समाधान निकालने के बजाय अब तक बैठकों पर ही जोर दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार प्रशासन ने मुख्यमंत्री के साथ बैठक करवाने का आश्वासन दिया है। यदि इस बार भी प्रभावित परिवारों की मांगों का उचित समाधान नहीं किया गया, तो समिति अपना संघर्ष जारी रखेगी। 50 दिनों तक लगभग 200 फीट ऊंचे बिजली टावर पर रहने और 51वें दिन सुरक्षित नीचे उतरने के बाद अब दोनों बुजुर्गों के मेडिकल और परिवार के साथ घर लौटने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वहीं, दशकों से लंबित मांगों के समाधान के लिए अगले सप्ताह मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

