गैर-सरकारी कॉलेज प्रबंधन महासंघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक, कॉलेजों के गंभीर मुद्दों पर हुई चर्चा

punjabkesari.in Monday, Jun 08, 2026 - 05:55 PM (IST)

अमृतसर: गैर-सरकारी कॉलेज प्रबंधन महासंघ पंजाब एवं चंडीगढ़ (एन.जी.सी.एम.एफ.) की कार्यकारिणी समिति की एक आपात बैठक आज एस.डी. कॉलेज, बरनाला में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश भर के कॉलेजों के समक्ष उपस्थित विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। महासंघ के अध्यक्ष सरदार रजिंदर मोहन सिंह छीना की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से संबंधित सहायता प्राप्त एवं एफिलिएटेड कॉलेजों की प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों और सचिवों ने भी भाग लिया।

बैठक में कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला द्वारा मान्यता प्राप्त कॉलेजों के लिए एंडोमेंट फंड दोगुना करने के निर्णय का कड़े शब्दों में विरोध किया। समिति ने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसे कठोर निर्णयों से बचना चाहिए, जो पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे कॉलेजों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर इस फैसले के खिलाफ राजनीतिक, प्रशासनिक तथा कानूनी स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।

PunjabKesari, Executive Committee Meeting of Non-Govt College Management Federation

इस अवसर पर सरदार छीना ने विश्वविद्यालय के इस निर्णय को अनुचित तथा कॉलेजों की वित्तीय स्थिति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बैठक की मेजबानी करते हुए एस.डी. कॉलेज के महासचिव एडवोकेट जतिंदर नाथ शर्मा ने उपस्थित प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही शैक्षणिक संस्थाओं को बचाने के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करना था।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने कला, विज्ञान एवं वाणिज्य (महिला) कॉलेजों के लिए एंडोमेंट फंड 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है, जबकि विधि, प्रोफेशनल, शारीरिक शिक्षा तथा अन्य बहुविषयक कॉलेजों के लिए यह राशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी गई है।

इस अवसर पर पंजाबी यूनिवर्सिटी अनएडेड कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार एस.एस. चट्ठा ने भी विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के हितों की रक्षा के लिए पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया।

सरदार छीना ने कहा कि पंजाब के सहायता प्राप्त कॉलेज, विशेषकर ग्रामीण एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कम छात्र संख्या वाले कॉलेज, आय और व्यय के बढ़ते अंतर के कारण पहले ही गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महासंघ सहायता प्राप्त कॉलेजों के हितों की रक्षा और उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए निदेशक लोक शिक्षा (डी.पी.आई.) तथा अन्य नियामक संस्थाओं के समक्ष लगातार अपना पक्ष रखता रहेगा।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के इस परिपत्र के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकारिणी समिति ने सहायता प्राप्त कॉलेजों पर बढ़ते प्रशासनिक खर्चों और सरकारी सहायता की कमी के कारण पड़ रहे वित्तीय दबाव पर भी चिंता व्यक्त की। समिति ने कहा कि इन कॉलेजों ने पंजाब के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से इन संस्थानों को मजबूत एवं स्थिर बनाने के लिए व्यापक नीति तैयार करने की मांग की।

महासंघ के महासचिव एस.एम. शर्मा ने बताया कि बैठक में अन्य कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार किया गया। इनमें डी.पी.आई. द्वारा लंबित अनुदान जारी करना, सभी नियमित अध्यापकों के लिए 95 प्रतिशत ग्रांट-इन-एड योजना लागू करना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 के अनुरूप शिक्षण एवं गैर-शिक्षण पदों की समीक्षा करना तथा ग्रेच्युटी एवं अर्जित अवकाश नकदीकरण राशि का भुगतान ग्रांट-इन-एड के अंतर्गत करना शामिल था।

बैठक में रविंदर नाथ जोशी, डॉ. महल सिंह, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. खुशविंदर कुमार, राहुल कुमार अत्तरी, सरबजीत सिंह कुलर, डॉ. पुष्पविंदर कौर, डॉ. हरकिरत सिंह, इंजीनियर विनोद जिंदल, राजीव जैन, राम कुमार सौबती, प्रदीप गोयल, हरभजन सिंह, आर.के. गुप्ता, गुरतेज सिंह बराड़, सतवंत सिंह, हरदयाल सिंह अत्तरी, गुरविंदर सिंह सरना, डॉ. नरेंद्र सिंह, एडवोकेट संजय गोयल,उधम सिंह औलख, डॉ. एम.एल. बंसल, डॉ. आर.के. गोयल, डॉ. मीना कुमारी सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Sunita sarangal

Related News