पंजाब के 17 जिलों में किसान आंदोलन की तैयारी, 8 जून को लेकर कर दिया ऐलान

punjabkesari.in Sunday, Jun 07, 2026 - 03:52 PM (IST)

पंजाज डेस्क :  देशभर में किसान संगठनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। 8 जून को केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के विरोध में पंजाब समेत कई राज्यों में व्यापक प्रदर्शन और पुतला फूंके जाने की योजना बनाई गई है। इसको लेकर ग्रामीण इलाकों में बैठकों और तैयारियों का दौर तेज हो गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि हाल ही में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा की ग्वालियर में हुई राष्ट्रीय बैठक में यह रणनीति तय की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और पंजाब में एक साथ विरोध जताया जाएगा।  पंजाब में ही करीब 17 जिलों से पुतला दहन की रणनीति तैयार हो चुकी है। 

किसानों की समस्याओं को सामने रखते हुए उन्होंने कहा कि इस समय खेतों में सबसे गंभीर दिक्कत यूरिया खाद की भारी कमी है। कई क्षेत्रों में किसानों को यूरिया के बदले अन्य महंगे कृषि उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, वहीं कुछ जगहों पर खाद की काला बाजारी भी खुलेआम हो रही है।

पंधेर ने स्पष्ट किया कि खाद संकट किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण समय पर खाद नहीं मिल पा रही, जिससे फसलों की पैदावार पर असर पड़ रहा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर भी किसान संगठनों ने नाराजगी जताई। पंधेर का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम घटाए नहीं गए, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है और महंगाई का बोझ किसानों पर पड़ रहा है।

भूमि अधिग्रहण को लेकर भी सरकारों पर सवाल उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत माला परियोजना समेत विभिन्न योजनाओं के तहत पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में किसानों की जमीनें जबरन अधिग्रहित की जा रही हैं। इसके साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और हाल के नीतिगत फैसलों को भी उन्होंने किसानों के हितों के खिलाफ बताया। किसान नेता ने चेतावनी दी कि यदि सरकारों ने इन मुद्दों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और तेज व व्यापक किया जाएगा। उन्होंने किसानों और मजदूरों से अपील की कि वे 8 जून के प्रस्तावित विरोध कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर अपनी आवाज बुलंद करें।

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News Editor

Urmila

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