पंजाब में 'पावन स्वरूपों' के मामले में हरपाल चीमा का एक और यू-टर्न, जानें अब क्या दिया स्पष्टीकरण
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 12:45 PM (IST)
बंगाः बंगा स्थित डेरा नाभा कंवल राजा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूपों को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने अपने पहले दिए गए बयान से पीछे हटते हुए नया स्पष्टीकरण दिया है। एक दिन पहले डेरा को क्लीन चिट देने वाले चीमा ने अब कहा है कि रिकॉर्ड सही पाए जाने की बात शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से कही गई थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 328 ‘लापता स्वरूपों’ की जांच के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) अपनी जांच जारी रखेगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितताओं के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री के इस बयान को आम आदमी पार्टी सरकार का एक और “यू-टर्न” माना जा रहा है, क्योंकि सोमवार को दिए गए उनके बयान पार्टी हाईकमान को रास नहीं आए थे। बीते दिन अपने दौरे के दौरान हरपाल चीमा, शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस और सांसद मलविंदर कंग ने दावा किया था कि डेरा में स्वरूपों के रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। हालांकि, इस पूरे मामले पर एसजीपीसी अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने 139 स्वरूपों को लेकर उठाए थे सवाल
वित्त मंत्री चीमा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के पुराने बयानों से अलग रुख अपनाते हुए यह भी कहा कि एसआईटी और मुख्यमंत्री के बीच किसी ‘गलतफहमी’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मान ने पहले दावा किया था कि एसजीपीसी के लापता स्वरूप बंगा डेरा में मिले हैं और उन्होंने 169 में से 139 स्वरूपों के हिसाब-किताब पर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब चीमा का कहना है कि डेरा प्रबंधन के अनुसार एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी वहां की व्यवस्थाओं से पूरी तरह संतुष्ट हैं और अधिकांश स्वरूप उस समय के हैं, जब उन्हें निजी प्रेसों में छापा जाता था।
25 जनवरी को होगा शुक्राना समागम
इस बीच, डेरा प्रबंधन ने इस मुश्किल दौर के समाप्त होने पर 25 जनवरी को शुक्राना समागम आयोजित करने का ऐलान किया है। डेरा के मुख्य प्रवक्ता अमरीक सिंह बल्लोवाल ने कहा कि यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन संगत ने अनुशासन और जिम्मेदारी का परिचय दिया। उन्होंने विशेष रूप से श्री अकाल तख्त साहिब, एसजीपीसी अध्यक्ष और विभिन्न सामाजिक व किसान संगठनों का धन्यवाद किया, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से डेरा का समर्थन किया।

