घर से भागकर Live-in रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए खास खबर, High Court ने सुनाया बड़ा फैसला

punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 02:45 PM (IST)

चंडीगढ़ (अंकुर तांगड़ी): पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स की सिक्योरिटी को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। एक मामले में हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल को पुलिस सिक्योरिटी देने से मना कर दिया है और उनकी पिटीशन खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में शादी एक पवित्र संस्था है और घर छोड़कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहना सिर्फ पर्सनल फ्रीडम का सवाल नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के सम्मान और इज्जत के अधिकार पर भी असर डालता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सिर्फ कुछ दिन साथ रहने का दावा करके पुलिस सिक्योरिटी नहीं मांगी जा सकती। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने पटियाला के रहने वाले लीरा और एक दूसरे युवक की पिटीशन खारिज कर दी। पिटीशन के मुताबिक, दोनों बालिग हैं, एक-दूसरे से प्यार करते हैं और भविष्य में शादी करना चाहते हैं। फिलहाल, वे लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं लेकिन उनके परिवार वाले उनके रिश्ते का विरोध कर रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है। इसीलिए उन्होंने पुलिस प्रोटेक्शन मांगी थी।

कोर्ट ने अपने ऑर्डर में कहा कि भारत अलग-अलग ट्रेडिशन, कल्चर और सोशल वैल्यू वाला देश है, जहां शादी को खास सोशल और लीगल मान्यता मिली हुई है। हालांकि समय के साथ समाज का एक हिस्सा वेस्टर्न कल्चर से प्रभावित होकर लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मॉडर्न लाइफस्टाइल ऑप्शन अपना रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे हर रिश्ते को लीगल प्रोटेक्शन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हर व्यक्ति को इज्जत और सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। यह अधिकार सिर्फ पिटीशनर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता को भी उतना ही मिलता है। कोर्ट ने कहा कि घर से भागे बच्चे न सिर्फ परिवार की सोशल इज्जत पर असर डालते हैं, बल्कि माता-पिता के इज्जतदार जीवन जीने के अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं।

कोर्ट ने एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप का स्टेटस देने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी होनी चाहिए। इसमें दोनों लोगों का शादी की उम्र का होना और समाज की नजर में पति-पत्नी के तौर पर रहना शामिल है। कोर्ट ने कहा कि पिटीशन में खुद माना गया है कि युवक की अभी शादी की उम्र नहीं हुई है और कहा गया है कि भविष्य में उम्र होने पर वे शादी कर लेंगे। ऐसे में इस रिश्ते को कानूनी रूप नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कुछ दिन साथ रहने के आधार पर सुरक्षा देना मंजूरी देने जैसा होगा, जिसे कानून के दायरे में सही नहीं माना जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने पिटीशन खारिज कर दी और उक्त जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।

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News Editor

Kamini

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