जालंधर निगम का सफाई सिस्टम सवालों में! 6 महीने से बिना टेंडर दौड़ रहीं 170 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
punjabkesari.in Saturday, Oct 03, 2026 - 10:34 AM (IST)
जालंधर (खुराना): नगर निगम जालंधर में सफाई व्यवस्था के लिए ट्रांसपेरेंसी एक्ट के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। पिछले करीब 6-7 महीनों से शहर में करीब 170 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां नियमित टैंडर के बिना कोटेशन/सैंक्शन वर्क के आधार पर चलाए जाने की बात सामने आई है। करोड़ों रुपए के इस काम के लिए फरवरी-मार्च में टैंडर लगाए गए थे, लेकिन ये आज तक सिरे नहीं चढ़ पाए।
जानकारी के अनुसार निगम के ओ. एंड एम. सैल की ओर से लगाए गए इन टेंडरों को पहले कोर्ट केस का हवाला देकर आगे नहीं बढ़ाया गया। बाद में टैंडर कैंसिल कर दिए गए, लेकिन कई सप्ताह बीतने के बावजूद इन्हें दोबारा री-काल नहीं किया गया। इससे निगम की टैंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस कोर्ट केस को टैंडर प्रक्रिया में रुकावट का कारण बताया गया, उसमें निगम की ओर से कथित तौर पर कोई वकील अदालत में पेश नहीं हुआ। निगम अधिकारियों की ओर से मामले में अपेक्षित पैरवी न किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि मामला अदालत में लंबित था तो निगम ने उसकी पैरवी को लेकर क्या कदम उठाए।
चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप
टैंडर प्रक्रिया आगे न बढ़ने के कारण सैंक्शन कोटेशन के आधार पर काम जारी है। आरोप है कि इससे कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लगातार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चलाने का काम मिल रहा है। गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने नगर निगम कमिश्नरों को इमरजेंसी नेचर के 5 लाख रुपये तक के काम ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत करवाने का अधिकार दिया हुआ है। इसका उद्देश्य ऐसे जरूरी कामों को तुरंत करवाना है, जहां सामान्य टैंडर प्रक्रिया में देरी से सार्वजनिक सेवा प्रभावित हो सकती है। जालंधर में इस प्रावधान के लगातार इस्तेमाल को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या लंबे समय तक चलने वाले नियमित कामों के लिए भी इसका सहारा लिया जा सकता है।
पिछले करीब छह महीनों से शहर में 170 के आसपास ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रोजाना सफाई के लिए चल रही हैं। इन पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ने की बात कही जा रही है, जबकि काम का लाभ लेने वाले ठेकेदारों की संख्या करीब आधा दर्जन बताई जा रही है। ऐसे में निगम के खर्च और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
2-3 दर्जन ट्रॉलियों पर जीपीएस नहीं, फिर भी हो रही पेमैंट
मेयर की ओर से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के काम की मॉनिटरिंग की व्यवस्था किए जाने के बावजूद करीब दो-तीन दर्जन ट्रॉलियों पर जी.पी.एस. सिस्टम नहीं लगा होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद इन ट्रॉलियों के काम की पेमेंट किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जीपीएस के बिना इन गाड़ियों की लोकेशन, रूट और काम की पुष्टि किस आधार पर की जा रही है, यह भी जांच का विषय है।
ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की संख्या बढ़ने और सफाई पर खर्च किए जाने के बाद शहर के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था में सुधार तो नजर आया है। लेकिन नियमित टैंडर न होने, लंबे समय तक कोटेशन के आधार पर काम चलने और कुछ ट्रॉलियों पर जी.पी.एस. न होने के कारण अब पूरी व्यवस्था की निगरानी और खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। निगम को अब इन कामों के लिए नियमित टैंडर प्रक्रिया पूरी करने के साथ-साथ अब तक किए गए भुगतान और सैंक्शन वर्क का पूरा रिकॉर्ड भी स्पष्ट करना होगा।
सफाई व्यवस्था देख कमिश्नर ने जताई नाराजगी, प्रमुख सड़कों और डंप स्थानों का किया दौरा
नगर निगम कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने आज सुबह हैल्थ ऑफिसर डॉ. श्री कृष्ण शर्मा व अन्य अधिकारियों के साथ शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने कई प्रमुख सड़कों और डंप स्थानों का दौरा कर मौके पर सफाई व्यवस्था देखी। टी.वी. सैंटर के सामने सहित कुछ अन्य डंप स्थानों पर गंदगी मिलने पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को तुरंत व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मुस्तैदी से काम करने तथा प्राइवेट ठेकेदारों के सफाई कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा है। कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि सफाई व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके लगातार फील्ड दौरे से आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। चाहे कमिश्नर को नया पदभार संभाले करीब एक महीना होने को है परंतु फिर भी अभी तक शहर की सफाई-व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है।
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