LADC विवाद गहराया, पंजाब के वकीलों का संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी!

punjabkesari.in Friday, Jul 31, 2026 - 02:16 PM (IST)

लुधियाना (मेहरा): LADC (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) नीति के विरोध में पंजाब भर के अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को लगातार 25 वें दिन भी जिला बार एसोसिएशन, लुधियाना के नेतृत्व में ‘नो वर्क’ पूरी तरह प्रभावी रहा। भूख हड़ताल जारी रही, जबकि जिला न्यायालय का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित रहा और अधिकांश मामलों में केवल अगली तारीखें ही दी गईं।

जिला बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट विपन सगड़ और महासचिव एडवोकेट हिमांशु वालिया ने कहा कि LADC नीति के खिलाफ अधिवक्ताओं का संघर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता और LADC नीति वापस नहीं ली जाती, तब तक ‘नो वर्क’ और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आंदोलन को पहले की तरह शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखा जाएगा।

अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में LADC नीति के विरोध में सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की ओर रोष रैली निकाली और अपनी मांगों को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लिखित आश्वासन मिलने और LADC नीति वापस लिए जाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

इस दौरान आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। पूर्व कांग्रेस विधायक संजय तलवाड़, पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस तथा पूर्व विधायक कुलदीप वैद आंदोलन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत अधिवक्ताओं को अपना समर्थन दिया। नेताओं ने कहा कि अधिवक्ताओं की मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं और वे उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मुद्दे को सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के माध्यम से लोकसभा में भी उठाया जाएगा, ताकि केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके।

इसी बीच जिला बार एसोसिएशन ने आंदोलन को और प्रभावी बनाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। जारी एक ‘अर्जेंट नोटिस’ में प्रधान एडवोकेट विपन सगड़, उपप्रधान एडवोकेट गगनदीप सिंह बेदी, महासचिव एडवोकेट हिमांशु वालिया, संयुक्त सचिव एडवोकेट रचिन सोनी तथा वित्त सचिव एडवोकेट मयंक चोपड़ा के हस्ताक्षरों से सभी सदस्यों को निर्देश जारी किए गए हैं। नोटिस में कहा गया है कि बार एसोसिएशन की बार-बार अपील के बावजूद कुछ अधिवक्ता आंदोलन में सहयोग नहीं कर रहे और नियमित रूप से अदालतों में पेश हो रहे हैं। कार्यकारिणी ने निर्णय लिया है कि आंदोलन जारी रहने तक समय-सीमा (Time-Barred/Under Limitation) वाले मामलों को छोड़कर किसी भी नए मामले की फाइलिंग की अनुमति नहीं होगी। साथ ही सभी सदस्यों को बार एसोसिएशन के निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि आदेशों की अवहेलना करने वाले सदस्यों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा LADC सिस्टम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जारी नई गाइडलाइन भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 27 जुलाई 2026 को रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी पत्र में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की स्वीकृति से कई महत्वपूर्ण सिफारिशें लागू की गई हैं, जिन्हें पंजाब, हरियाणा और यूटी चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजा गया है।

नई गाइडलाइन के अनुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिव ही LADC की नियुक्ति करेंगे तथा कोई भी LADC सीधे जेल में बंद आरोपी से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त नहीं कर सकेगा। यदि किसी मामले में निजी वकील अनुपस्थित रहता है तो अदालत बिना कारण दर्ज किए सीधे LADC नियुक्त नहीं करेगी। पहले अनुपस्थिति संबंधी आदेश पारित होगा और आरोपी या उसके वकील को अगली तारीख पर उपस्थित होने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी अनुपस्थिति रहने पर ही मामला DLSA को भेजा जाएगा।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिमांड के दौरान यदि आरोपी का निजी वकील मौजूद है तो अदालत उसके आने का इंतजार करेगी। केवल ऐसे मामलों में, जहां आरोपी के पास कोई निजी वकील नहीं होगा, वहीं LADC की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

निर्देशों में कहा गया है कि केवल लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987 की धारा 12 के तहत पात्र व्यक्तियों को ही कानूनी सहायता दी जाएगी। साथ ही LADC को पेशेवर आचार संहिता का पालन करने, निजी मुकदमे हासिल करने या अपने अथवा अपने परिवार एवं चैंबर के लिए कार्य जुटाने से सख्त परहेज करने के निर्देश दिए गए हैं। जेल विजिट का रोस्टर, जमानत मामलों में एक समान नीति तथा सभी न्यायिक अधिकारियों और DLSA सचिवों द्वारा इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

उधर जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ऑफ बार एसोसिएशंस, पंजाब, हरियाणा एवं यूटी चंडीगढ़ ने आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी तेज कर दी है। कमेटी के संयोजक एडवोकेट सतविंदर सिंह सिद्धू ने 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर LADC नीति के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी है। यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज करने की चेतावनी दी गई है।

बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संघर्ष केवल अधिवक्ताओं के हितों तक सीमित नहीं, बल्कि कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, न्याय व्यवस्था की गरिमा और आम नागरिकों की न्याय तक प्रभावी एवं सुलभ पहुंच की रक्षा का आंदोलन है। उन्होंने सभी बार एसोसिएशनों, सामाजिक संगठनों और न्यायप्रिय नागरिकों से नैतिक समर्थन की अपील करते हुए कहा कि मांगें पूरी होने तक संघर्ष पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

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News Editor

Urmila

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