PM-राहत योजना होगी और आसान, WhatsApp से जोड़ने की तैयारी में केंद्र सरकार!
punjabkesari.in Friday, Jul 17, 2026 - 11:13 AM (IST)
बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि) : सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन ऑवर' (दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा) के दौरान त्वरित और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'पीएम-राहत को और अधिक सुलभ बनाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। ट्राइडेंट ग्रुप के चेयरमैन और राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण सुझाव पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। सांसद गुप्ता ने सुझाव दिया था कि इस आपातकालीन सेवा की पहुंच बढ़ाने और इसे हर नागरिक तक आसानी से पहुंचाने के लिए इसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'व्हाट्सएप' से एकीकृत किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सांसद राजिंदर गुप्ता को लिखे एक अर्धशासकीय पत्र में उनके इस विचार की सराहना की है। मंत्री गडकरी ने कहा कि आपातकालीन स्थितियों में जहां विश्वसनीय जानकारी तक त्वरित पहुंच बेहद नाजुक होती है, वहां व्हाट्सएप जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले माध्यम से आम नागरिकों को पास के सूचीबद्ध अस्पतालों की पहचान करने, योजना से संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त करने और समय पर सहायता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। मंत्रालय अब संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श कर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा मानकों का अध्ययन कर रहा है।
योजना की अब तक की प्रगति और 112 से एकीकरण
पत्र में केंद्रीय मंत्री ने 'पीएम-राहत योजना की अब तक की शानदार प्रगति का भी विवरण साझा किया। फरवरी 2026 में लॉन्च होने के बाद से मात्र कुछ महीनों के भीतर ही इस योजना को देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपनाया जा चुका है। अब तक 18,000 से अधिक सड़क दुर्घटना पीड़ित इस योजना के तहत पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें से अस्पतालों द्वारा 9,700 से अधिक दावों की प्रक्रिया शुरू की गई है और 5,300 से अधिक दावों का भुगतान भी किया जा चुका है।
इसके अलावा, नितिन गडकरी ने बताया कि दुर्घटना के तुरंत बाद पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए इस व्यवस्था को राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर '112' के साथ देश के 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत किया गया है। इसके जरिए नजदीकी नामित अस्पतालों की पहचान, एम्बुलेंस भेजने और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को तुरंत सूचित करने की व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर रही है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप, राज्यों को अन्य एम्बुलेंस प्रणालियों को भी 112 के साथ जोड़ने की सलाह दी गई है।
एम-परिवहन ऐप पर भी सुविधा उपलब्ध
वर्तमान में इस योजना का एक समर्पित मॉड्यूल 'एम-परिवहन' मोबाइल ऐप पर पहले से ही उपलब्ध है, जिसके माध्यम से अस्पताल की खोज, योजना की जानकारी और पुलिस रिस्पांस की डिजिटल ट्रैकिंग की जा सकती है। अब व्हाट्सएप के माध्यम से इन सुविधाओं को पूरक बनाने की योजना पर काम चल रहा है ताकि दूरदराज के इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंच सके।
बरनाला और पंजाब भर के सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सांसद राजिंदर गुप्ता के इस जनहितैषी सुझाव और केंद्रीय मंत्री की त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि इस कदम से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की दर को कम करने में एक युगांतकारी मदद मिलेगी।

