पंजाब कांग्रेस ने 2027 चुनाव से पहले फिर दोहराई 2021 सिद्धू-कैप्टन की कहानी, रंधावा खुले तौर पर चन्नी के साथ
punjabkesari.in Monday, Jul 06, 2026 - 04:36 PM (IST)
पंजाब डेस्क : पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल के चंडीगढ़ पहुंचने से पहले ही गुटबाजी और तेज हो गई है। गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभाल लिया है।

मोहाली में हुई एक अहम बैठक के बाद रंधावा और चन्नी ने सोशल मीडिया पर नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिन पर “Unity is Strength” लिखा गया। इन तस्वीरों में जालंधर कैंट से विधायक प्रगट सिंह, नए वर्किंग प्रधान संगत सिंह गिलजियां, विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू सहित कई वरिष्ठ नेता नजर आए। हालांकि, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग इस फोटो से नदारद रहे।
वहीं पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने बिना नाम लिए चन्नी और वड़िंग दोनों को नसीहत दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और पंजाब के हित में कांग्रेस नेताओं से त्याग और कुर्बानी की उम्मीद है। उनके इस बयान को पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, चन्नी राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी को लेकर उन्होंने मोरिंडा स्थित अपने घर पर करीब 50 नेताओं के साथ बैठक कर शक्ति प्रदर्शन किया। इसके जवाब में राजा वड़िंग भी अलग-अलग हलकों में जाकर नेताओं से मिल रहे हैं और अपना समर्थन मजबूत करने में जुटे हैं।
इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी प्रभारी भूपेश बघेल चंडीगढ़ पहुंच रहे हैं, जहां वे चन्नी, वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में हालात 2021 जैसे बनते जा रहे हैं, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच टकराव पार्टी के लिए भारी पड़ा था।
पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी घमासान खुलकर सामने आ गया है। हालात ऐसे बन रहे हैं, जैसे साल 2021 में बने थे, जब पार्टी सत्ता में होने के बावजूद आपसी कलह के कारण भारी नुकसान झेल बैठी थी। उस वक्त टकराव कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच था, जबकि अब 2026 में यही स्थिति पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच बनती दिख रही है।
सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस हाईकमान के रवैये को लेकर खड़ा हो रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिल्ली में बैठा नेतृत्व इस बार भी पंजाब के हालात पर ‘साइलेंट मोड’ में है, जैसा 2021 में था। उसी ढुलमुल रवैये का नतीजा यह हुआ कि पार्टी बिखर गई और सत्ता से बाहर हो गई।
इस बार विवाद की जड़ संगठन का नेतृत्व है। राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने से चन्नी खेमा नाराज है और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है। चन्नी ने मोरिंडा स्थित अपने घर पर समर्थक नेताओं की बैठक कर अपनी ताकत दिखाई, तो वहीं वड़िंग भी अलग-अलग हलकों में जाकर अपने समर्थन का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसी बीच नवजोत सिंह सिद्धू गुट की सक्रियता से पार्टी की अंदरूनी लड़ाई अब त्रिकोणीय होती जा रही है। खुले तौर पर हो रही इस खींचतान ने पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में कांग्रेस विपक्ष में है और 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। अगर हाईकमान ने समय रहते ठोस फैसला नहीं लिया, तो 2021 की तरह यह गुटबाजी एक बार फिर इतिहास दोहरा सकती है और कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
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