पंजाब विधान सभा चुनावः झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वालों का छलका दर्द

punjabkesari.in Wednesday, Feb 09, 2022 - 04:23 PM (IST)

गिद्दड़बाहा: मतदान का माहौल चल रहा है। राजनीतिक नेता लोगों के घर वोटें मांगने जा रहे हैं परन्तु उन लोगों का क्या जिनका घर ही नहीं। मतदान नजदीक आने पर राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने के लिए कई वायदे करती हैं। आसमान नीचे झुग्गी-झोंपड़ियों में रहने वालों को आराम की नींद नहीं आती चाहे ये इसके आदी हो गए हैं। बदलते मौसम, चमकती बिजली, गरजते बादल देख कर यह लोग एकदम डर जाते हैं। सहम के माहौल में रहने वालों के लिए कोई आजादी नहीं। हथौड़ों-छैनियों के साथ लोहा पीटने वाले यह टपरीवास आखिर लोहे जैसे ही हो जाते हैं। मशीनी युग ने इनसे रोजगार भी छीन लिया है। आज भी यह गरीब लोग सरकारी सहायता का इंतजार में बैठे हैं।

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पत्रकारों से जगवंत बराड़ की तरफ से जब जिला श्री मुक्तसर साहिब के शहर गिद्दड़बाहा का दौरा किया गया तो यहां के लोग जो पिछले 30-35 सालों से झुग्गी-झोंपड़ियों में रह रहे हैं,  ने बताया कि किसी भी सरकार ने उनके पक्के घर नहीं बना कर दिए। सरकारों ने कहा था कि उन्हें 5-5 मरले के प्लाट देंगे, पक्के घर बना कर देंगे परन्तु तस्वीरें देखकर सच्चाई पता लगती है। बातचीत दौरान इन गरीब लोगों ने बताया कि किसी भी नेता या सरकार ने उनके घर नहीं बनाए। वोटों के बाद इन गरीबों की कोई सार नहीं लेता।

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झुग्गी-झोंपड़ी में रह रहे पप्पू सिंह नाम के व्यक्ति ने बताया कि उन्हें यहां 30-35 साल हो गए रहते, इन वर्षों दौरान उनका पक्का घर नहीं बना, किसी नेता ने उनको कुछ नहीं दिया, वह दाना मंडी में रह रहे हैं, सरकार उनको जब मर्जी यहां से उठा सकती है। वोट बनी हुई है। वोटों के समय नेता आकर कह जाते हैं कि आपको 5-5 मरले देंगे परन्तु वोटों के बाद उन्हें कोई नहीं पूछता। बस टाइम पास कर रहे हैं। टीन-लोहो के चूल्हे और अन्य सामान बना कर गुजारा करते हैं परन्तु यह सामान भी अब बहुत कम बिकता है। बारिश-आंधी में भीगना पड़ता है। समय के साथ-साथ इन लोगों के हालात और बुरे होते जा रहे हैं।

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महिलाओं ने बातचीत करते कहा कि उनका कोई मसला हल नहीं हुआ, बस बहाने ही हैं, उनकी कोई नहीं सुनता। बीमार होने पर इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं होते। सवाल उठता है कि क्या राजनीतिक नेताओं की बातें सिर्फ बहानों तक ही सीमित रहेंगी या इन लोगों का कोई विकास भी होगा। जिस देश के अंदर यह लोग रहते हैं,  इन लोगों का विकास कैसे हो, यह अपने-आप में बड़ा सवाल हैं।

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News Editor

Urmila

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